पूजा एक धार्मिक आदर व्यक्त करने का एक धार्मिक आयोजन होता है जो भगवान, देवी-देवताओं, गुरु, या किसी पवित्र वस्तु की प्रतिमा, मूर्ति, के सामने किया जाता है

श्री सुमतिनाथ जिन पूजा – Shree Sumtinaath Jin Pooja

संजम रतन विभूषन भूषित, दूषन वर्जित श्री जिनचन्द| सुमति रमा रंजन भवभंजन, संजययंत तजि मेरु नरिंद|| मातु मंगला सकल मंगला, नगर विनीता जये अमंद| सो प्रभु दया सुधा रस गर्भित आय तिष्ठ इत हरो दुःख दंद |1| ॐ ह्रीं श्रीसुमतिनाथ…

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श्री सुपार्श्वनाथ जिन पूजा – Shree Suparshvnaath Jin Pooja

जय जय जिनिंद गनिंद इन्द, नरिंद गुन चिंतन करें| तन हरीहर मनसम हरत मन, लखत उर आनन्द भरें|| नृप  सुपरतिष्ठ  वरिष्ठ  इष्ट,  महिष्ठ शिष्ट  पृथी  प्रिया| तिन नन्दके पद वन्द वृन्द, अमंद थापत जुतक्रिया|| ॐ ह्रीं श्रीसुपार्श्वनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर…

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श्री आदिनाथ जिन पूजा – Shree Aadinaath Jin Pooja

https://youtu.be/W6kEoTe05Es कविश्री जिनेश्वरदास (कुसुमलता छंद)नाभिराय-मरुदेवि के नंदन, आदिनाथ स्वामी महाराज|सर्वार्थसिद्धि तें आय पधारे, मध्य-लोक माँहिं जिनराज||इन्द्रदेव सब मिलकर आये, जन्म-महोत्सव करने काज|आह्वानन सब विधि मिलकर के, अपने कर पूजें प्रभु आज||ॐ ह्रीं श्री आदिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर! अवतर! संवौषट्! (इति आह्वाननम्)ॐ…

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श्री अजितनाथ जिन पूजा – Shree Ajitnaath Jin Pooja

https://youtu.be/Pmz3KPZHWoM त्याग वैजयन्त सार सार-धर्म के अधार,जन्मधार धीर नम्र सुष्टु कौशलापुरी|अष्ट दुष्ट नष्टकार मातु वैजयाकुमार,आयु लक्षपूर्व दक्ष है बहत्तरैपुरी||ते जिनेश श्री महेश शत्रु के निकन्दनेश,अत्र हेरिये सुदृष्टि भक्त पै कृपा पुरी|आय तिष्ठ इष्टदेव मैं करौं पदाब्जसेव,परम शर्मदाय पाय आय शर्न आपुरी||  ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिन ! अत्रावतरावतर संवौषट् |ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिन ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः |ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिन ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् |      अष्टकगंगाह्रदपानी निर्मल आनी, सौरभ सानी सीतानी |तसु धारत धारा तृषा निवारा, शांतागारा सुखदानी ||श्री अजित जिनेशं नुतनाकेशं, चक्रधरेशं खग्गेशं |मनवांछितदाता त्रिभुवनत्राता, पूजौं ख्याता जग्गेशं ||ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय जन्म जरा मृत्युविनाशनाय जलं नि0स्वाहा |1|  शुचि चंदन बावन ताप मिटावन, सौरभ पावन घसि ल्यायो |तुम भवतपभंजन हो शिवरंजन, पूजन रंजन मैं आयो || श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय भवातापविनाशनाय चन्दनं नि0स्वाहा |2|  सितखंड विवर्जित निशिपति तर्जित, पुंज विधर्जित तंदुल को |भवभाव निखर्जित शिवपदसर्जित, आनंदभर्जित दंदल को || श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय अक्षय पदप्राप्तये अक्षतान् नि0स्वाहा |3|  मनमथ-मद-मंथन धीरज-ग्रंथन, ग्रंथ-निग्रंथन ग्रंथपति |तुअ पाद कुसेसे आधि कुशेसे, धारि अशेसे अर्चयती || श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय कामबाण विध्वंसनाय पुष्पं नि0स्वाहा |4|  आकुल कुलवारन थिरताकारन, क्षुधाविदारन चरु लायो |षट् रस कर भीने अन्न नवीने, पूजन कीने सुख पायो || श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नेवैद्यं नि0स्वाहा |5|  दीपक-मनि-माला जोत उजाला, भरि कनथाला हाथ लिया |तुम भ्रमतम हारी शिवसुख कारी, केवलधारी पूज किया |श्री अजित जिनेशं नुतनाकेशं, चक्रधरेशं खग्गेशं |मनवांछितदाता त्रिभुवनत्राता, पूजौं ख्याता जग्गेशं ||ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय मोहान्धकार विनाशनाय दीपं नि0स्वाहा |6|  अगरादिक चूरन परिमल पूरन, खेवत क्रूरन कर्म जरें |दशहूं दिश धावत हर्ष बढ़ावत, अलि गुण गावत नृत्य करें || श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय अष्टकर्मदहनाय धूपं नि0स्वाहा |7|  बादाम नंरगी श्रीफल पुंगी आदि अभंगी सों अरचौं |सब विघनविनाशे सुख प्रकाशै, आतम भासै भौ विरचौं ||श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय मोक्षफल प्राप्तये फलं नि0स्वाहा |8|  जलफल सब सज्जे, बाजत बज्जै, गुनगनरज्जे मनमज्जे |तुअ पदजुगमज्जै सज्जन जज्जै, ते भवभज्जै निजकज्जै ||श्री0ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्यपदप्राप्तये अर्घ्यं नि0स्वाहा |9|  पंचकल्याणक जेठ असेत अमावशि सोहे, गर्भदिना नँद सो मन मोहे |इंद फनिंद जजे मनलाई, हम पद पूजत अर्घा चढ़ाई ||ॐ ह्रीं ज्येष्ठकृष्णा-अमावस्यां गर्भमंगलप्राप्तायश्रीअजितनाथ जिनेन्द्राय अर्घ्यं नि0स्वाहा |1|  माघ सुदी दशमी दिन जाये, त्रिभुवन में अति हरष बढ़ाये |इन्द फनिंद जजें तित आई, हम इत सेवत हैं हुलशाई ||ॐ ह्रीं माघशुक्ला दशमीदिने जन्मंगलप्राप्ताय श्रीअजित0 अर्घ्यं नि0स्वाहा |2|  माघ सुदी दशमी तप धारा, भव तन भोग अनित्य विचारा |इन्द फनिंद जजैं तित आई, हम इत सेवत हैं सिरनाई ||ॐ ह्रीं माघशुक्ला दशमीदिने दीक्षाकल्याणकप्राप्ताय श्रीअजित0 अर्घ्यं नि0स्वाहा |3|  पौषसुदी तिथि ग्यारस सुहायो, त्रिभुवनभानु सु केवल जायो |इन्द फनिंद जजैं आई, हम पद पूजत प्रीति लगाई ||ॐ ह्रीं पौषशुक्लाएकादशीदिनेज्ञानकल्याणकप्राप्ताय श्रीअजित0 अर्घ्यं नि0स्वाहा |4|  पंचमि चैतसुदी निरवाना, निजगुनराज लियो भगवाना |इन्द फनिंद जजैं तित आई, हम पद पूजत हैं गुनगाई ||ॐ ह्रीं चैत्रशुक्ला पंचमीदिने निर्वाणमंगलप्राप्ताय श्रीअजित0 अर्घ्यं0 |5| …

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श्री महावीर जिन पूजा 2022 || New Shri Mahaveer Jin Pooja

भारत छन्द हे जिन वीर महति अतिवीर, महावीर सन्मति देव हमारे हे अन्तिम जिनशासन नायक, तीर्थ तुम्हारा भव से तारे। त्रिशला नन्दन तुम को वन्दन, हे सिद्धारथ राज दुलारे मेरे उर के सिंहासन पर, शीघ्र पधारो भक्त निहारे॥ ओं ह्रीं…

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श्री पार्श्वनाथ जिन पूजा 2022 || New Parasnath Jin Pooja

विद्याब्धि छन्द (तर्ज- हम लाये हैं तूफान से.....1) श्री विश्वसेन भूप बाल, लोक भाल हो, वाराणसी में जन्म लिया, अहि कृपाल हो । तेईसवें जिन ! आपने, मन अक्ष जीत के, कैवल्य ज्ञान पा लिया, उपसर्ग जीत के ॥ हे…

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श्री शान्तिनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Shantinath Jin Pooja

ज्ञानोदय छंद शान्तिनाथ सोलम तीर्थंकर, पंचम चक्री पद त्यागी। कामदेव द्वादशवें प्रभु की पूजा करते बड़भागी॥ हस्तिनापुर ऐरा माता, विश्वसेन नृप तात रहे। पाँचों कल्याणक से मण्डित, शान्तिनाथ जिन आप रहे॥ पुष्पदन्त से धर्मनाथ के, बीच तीर्थ विच्छेद रहा। किन्तु…

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श्री नेमिनाथ जिन पूजा 2022 || New Neminath Jin Pooja

योगिनी बोधिनी छन्द लय- एक सौ त्रेसठ...... नेमि तीर्थेश जिन वीतरागी हुए, राजिमति त्याग के मुक्ति रागी हुए बाल ब्रह्मेश जिन मम हृदय आइये, पूजते भक्ति से दुःख हर जाइये॥ ॐ ह्रीं तीर्थंकर नेमिनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्…

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श्री कुन्थुनाथ जिन पूजा 2022 | New Shri Kunthunath Jin Pooja

जिनगीतिका छन्द सर्वार्थ सिद्धि विमान से जिन, नाथ बनने उतरते। प्रभु हस्तिनापुर शूरसेन, नृपेश गृह में जनमते॥ जिन कुन्थु तीर्थंकर मदन, चक्रेश पद को धारते। ऐसे जिनेश्वर को हृदय में, पूजने अवतारते॥ ओं ह्रीं तीर्थंकरकुन्थुनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्…

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श्री अरनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Arnath Jin Pooja

तर्ज- दयालु प्रभु से........... अरनाथ स्वामी, शरण तेरी आये, दुख दूर होवें कर्म के सताये। हथिनापुर  में  जन्म  लिया  है, मित्रा  माता  धन्य  किया  है। तात सुदर्शन नृप हरषाये, सुर नर किन्नर मंगल गाये ॥ अरनाथ स्वामी........ | षट्खण्ड  स्वामी …

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श्री मल्लिनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Mallinath Jin Pooja

सखी छन्द अपराजित तज भू आये, मिथिलापुर जन्म लहाये। पितु कुम्भ प्रजावती माता, जिनका यश सब जग गाता॥ प्रभु मल्लिनाथ जिन आते, माता के गर्भ समाते। हम पूजन करने आये, वसु द्रव्य हाथ में लाये॥ ओं ह्रीं तीर्थंकरमल्लिनाथजिनेन्द्र ! अत्र…

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श्री मुनिसुव्रतनाथ पूजा 2022 || New Shri Muni Subratnath Jin Pooja

भारत छन्द -लय-वीर हिमाचल तैं प्राणत स्वर्ग तजो जिनराज, सु राजगृही प्रभु जन्म लियो है। श्री सुखमित्र सुमित्र पिता, पद्मा जननी घर धन्य कियो है॥ हे मुनिसुव्रतनाथ जिनेश्वर !, है हृदयांगन देश हमारो। वेग हरो मम पीर जरा मृति, देर…

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