भक्तामर जैन धर्म के प्रमुख तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के महिमा के लिए है, यह जैन धर्म के महत्वपूर्ण पाठों में से एक है और इसे संस्कृत में लिखा गया है।

भक्तामर स्तोत्र संस्कृत Bhaktamar Stotra in Sanskrit

Bhaktamar Stotra Sanskrit  की रचना आचार्य मानतुंग जी ने 7वीं शताब्दी मे की थी, आचार्य मानतुंग जी उस समय के प्रसिद्ध राजा भोज के काल में हुए थे। उन्होंने इसकी रचना तब की जब उन्हें राजा ने किसी कारणवश 48 तालों वाली जेल…

Continue Readingभक्तामर स्तोत्र संस्कृत Bhaktamar Stotra in Sanskrit

શ્રી ભક્તામર સ્તોત્રમ્ – Bhaktamar Stotra in Gujarati

(વસંતતિલકાવૃતમ્) ભક્તામર પ્રણત મૌલિ મણિ પ્રભાણા- મુદ્યોતકં દલિત પાપ તમો વિતાનમ્ ; સમ્યક્ પ્રણમ્ય જિન પાદ યુગં-યુગાદા- વાલમ્બનં ભવ જલે પતતાં જનાનામ્.।।૧।। યઃ સંસ્તુતઃ સકલ વાડ્મય તત્વ બોધા- દુદભૂત બુદ્ધિ પટુભિઃ સુરલોક નાથૈઃ; સ્તોત્રૈ ર્જગત્ત્રિતય ચિત્ત હરૈ રુદારૈઃ- સ્તોષ્યે કિલાહ મપિ…

Continue Readingશ્રી ભક્તામર સ્તોત્રમ્ – Bhaktamar Stotra in Gujarati

भक्तामर स्तोत्र की महिमा || BHAKTAMAR MAHIMA ||

पं. हीरालाल जैन ‘कौशल’ श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रातः। भक्ति मन लाई, सब संकट जाये नशाई॥ जो ज्ञान-मान-मतवारे थे, मुनि मानतुंग से हारे थे। उन चतुराई से नृपति लिया, बहकाई ॥ सब ॥१॥ मुनि जी को नृपति बुलाया…

Continue Readingभक्तामर स्तोत्र की महिमा || BHAKTAMAR MAHIMA ||

भक्तामर स्तोत्र (भाषा) Bhaktamar Stotra Hindi

श्री प. हेमराज जी आदिपुरुष आदीश जिन, आदि सुविधि करतार।धरम-धुरंधर परमगुरु, नमों आदि अवतार॥ सुर-नत-मुकुट रतन-छवि करैं,अंतर पाप-तिमिर सब हरैं।जिनपद बंदों मन वच काय,भव-जल-पतित उधरन-सहाय॥1॥ श्रुत-पारग इंद्रादिक देव,जाकी थुति कीनी कर सेव।शब्द मनोहर अरथ विशाल,तिस प्रभु की वरनों गुन-माल॥2॥ विबुध-वंद्य-पद…

Continue Readingभक्तामर स्तोत्र (भाषा) Bhaktamar Stotra Hindi

भक्तामर स्तोत्र संस्कृत || Bhaktamar Stotra Sanskrit

श्रीमन्मानतुङ्गाचार्य कृत भक्तामर स्तोत्र, Jain dharm ke अद्भुत रत्नों में से एक है Shri Bhaktamar Stotra Sanskrit, जो Acharya Manatunga द्वारा Sanskrit भाषा में रचित एक अद्वितीय स्तोत्र माना जाता है. यह केवल कविता नहीं, बल्कि ek aisi spiritual sadhana…

Continue Readingभक्तामर स्तोत्र संस्कृत || Bhaktamar Stotra Sanskrit