आरती नियमित रूप से भगवान, देवी-देवताओं, गुरु, या किसी पवित्र स्थल की पूजा के साथ की जाती है। यह पूजा का अहम हिस्सा होती है जो भक्ति और श्रद्धा के साथ की जाती है।

चौबीसों भगवान की आरती – Chaubeeson Bhagwan ki Aarti

करहूं आरती आज जिनेश्वर तुम्हरे द्वारे; कर दो भव से पार लगा दो नैया किनारे, ऋषभ अजित सम्भव जिन स्वामी; अभिनन्दन भगवान लगा दो नैया किनारे, सुमति पद्म सुपार्श्व जिन स्वामी; चन्दाप्रभु भगवान, लगा दो नैया किनारे, पुष्प श्रेय शीतल…

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आरती पंचपरमेष्ठी – Aarti Panchaparmeshthi Ki

इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। टेक। पहली आरती श्री जिनराजा, भवदधि पार उतार जिहाजा।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरन करत मिटै भव फेरी।। इहविधि मंगल आरती कीजै,…

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