सामायिक पाठ – Samayik Path | नित देव मेरी आत्मा

कविश्री रामचरित उपाध्याय नित देव! मेरी आत्मा, धारण करे इस नेम को, मैत्री रहे सब प्राणियों से, गुणी-जनों से प्रेम हो| उन पर दया करती रहे, जो दु:ख-ग्राह-ग्रहीत हैं, सम-भाव उन सबसे रहे, जो वृत्ति में विपरीत हैं ||१|| करके…

Continue Readingसामायिक पाठ – Samayik Path | नित देव मेरी आत्मा

सामायिक पाठ | Samayik Path(प्रेम भाव हो सब जीवों से)

प्रेम भाव हो सब जीवों से, गुणीजनों में हर्ष प्रभो। करुणा स्रोत बहे दुखियों पर,दुर्जन में मध्यस्थ विभो॥ १॥ यह अनन्त बल शील आत्मा, हो शरीर से भिन्न प्रभो। ज्यों होती तलवार म्यान से, वह अनन्त बल दो मुझको॥ २॥…

Continue Readingसामायिक पाठ | Samayik Path(प्रेम भाव हो सब जीवों से)

सामायिक पाठ – Samayak Path(काल-अनंत भ्रम्यो)

कविश्री बुध महाचंद्र प्रथम : प्रतिक्रमण-कर्म काल-अनंत भ्रम्यो जग में सहये दु:ख-भारी | जन्म-मरण नित किये पाप को है अधिकारी || कोटि-भवांतर माँहिं मिलन-दुर्लभ सामायिक | धन्य आज मैं भयो योग मिलियो सुखदायक ||१|| हे सर्वज्ञ जिनेश! किये जे पाप…

Continue Readingसामायिक पाठ – Samayak Path(काल-अनंत भ्रम्यो)