Acharya Vandana – जैन आचार्य वंदना
श्रीसिद्धभक्ति अथ पौर्वाह्निक (अपराह्निक) आचार्य-वन्दना-क्रियायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण, सकलकर्मक्षयार्थं भाव-पूजा-वन्दना-स्तव-समेतं श्रीसिद्धभक्तिकायोत्सर्गं कुर्वेऽहम्। (९ बार णमोकार ) सम्मत्त-णाण-दंसण-वीरिय-सुहुमं तहेव अवगहणं। अगुरुलहु-मव्वावाहं, अ_गुणा होंति सिद्धाणं॥ १॥ तवसिद्धे, णय-सिद्धे, संजम-सिद्धे, चरित्त-सिद्धे य। णाणम्मि दंसणम्मि य, सिद्धे सिरसा णमंसामि॥ २॥ इच्छामि भंते। सिद्ध-भत्ति-काउस्सग्गो कओ तस्सालोचेउं सम्म…
