पंच मेरु पूजा || Panch Meru Pooja

कविवर ज्ञानतराय गीता छंद तीर्थंकरों के न्हवन जलतें भये तीरथ शर्मदा, तातें प्रदच्छन देत सुर गन पंच मेरुन की सदा | दो जलधि ढाई द्वीप में सब गनत-मूल विराजहीं, पूजौं असी जिनधाम प्रतिमा होहि सुख दुख भाजहीं || ॐ ह्रीं…

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