साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते चल रे राही चल – Jain Bhajan

siddha puja bhasha

Talking jinvani

“साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते चल रे राही चल…” एक अत्यंत प्रेरणादायक जैन भजन है, जो आत्मा को उसके असली लक्ष्य — मोक्ष — की ओर बढ़ने के लिए जाग्रत करता है। यह भजन जीवन के भ्रमित रास्तों से हटकर साधना, संयम और आत्म-शुद्धि के मार्ग पर चलने का आह्वान करता है।

“चल रे राही चल” — यह पुकार आत्मा को आमंत्रण देती है कि वह मोह, आलस्य और कर्मों की बेड़ियों को छोड़कर उस मार्ग पर चले जहाँ आत्मा को उसकी शुद्ध पहचान मिलती है। यह भजन विशेष रूप से ध्यान-साधना शिविरों, प्रवचन आरंभ, या आत्मचिंतन सत्रों में आत्म-प्रेरणा के रूप में गाया जाता है।

Jain Bhajan

साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते चल रे राही चल।
मुक्ति की मंजिल मिले, शान्ति की सरसिज खिले।।
चल रे राही चल।।टेक।।

Talking jinvani

ज्ञान ही अज्ञान था, तो भटकते थे हर जनम।
छल कपट माया में पड़कर, करते रहे हम हर कदम।।
राह हो कल्याण की, हो शरण भगवान की
चल रे राही चल ।।१।।

कौन है अपना यहाँ, किसको पराया हम कहें।
एक की आखों में खुशियां, एक के आँसू बहैं।।।
आत्म मंदिर ले चले, ज्योति से ज्योति जले।
चल रे राही चल ।।२।।

साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते चल रे राही चल।
मुक्ति की मंजिल मिले, शान्ति की सरसिज खिले।।
चल रे राही चल।।टेक।।

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Note

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Swarn Jain

My name is Swarn Jain, A blog scientist by the mind and a passionate blogger by heart ❤️, who integrates my faith into my work. As a follower of Jainism, I see my work as an opportunity to serve others and spread the message of Jainism.

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