Shri Parshvanath Stuti

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या – Jain Bhajan

“मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या” एक गहन आत्मचिंतन से परिपूर्ण जैन भजन है, जो साधक को भीतर झाँकने और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। इस भजन में अहंकार, देह-भाव, और सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर, आत्मा के शाश्वत, निर्मल और चेतन स्वरूप को समझने का सुंदर प्रयास किया गया है।

भक्त इस भजन के माध्यम से प्रभु के चरणों में विनम्रता से स्वीकार करता है कि शरीर, पद, धन, प्रतिष्ठा क्षणिक हैं, जबकि हमारा सच्चा अस्तित्व हमारी शुद्ध आत्मा है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति हमें मोक्षमार्ग पर अग्रसर होते हुए स्व-पहचान करने की ओर मार्गदर्शित करती है।

Jain Bhajan

मैं क्या.. मेरा अस्तित्व क्या.. गुरुवर तेरा ही… नाम लिया…

तेरा आशीर्वाद हमें… मिलता सुबह और शाम रहा…

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या… गुरुवर तेरा ही नाम लिया…

तेरी ही खुशबू है जीवन में… हम मुरझाये फूल हैं…

सूरज चांद सितारे भी…  तेरे चरणों की धूल हैं…

तीर्थ हो तुम चारों मेरे… आगम तेरे, आचरण में पले…

जाऊं अब मैं शरण कहां… अन्य मुझे नही स्थान मिलें…

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या… गुरुवर तेरा ही… नाम लिया…

तूने दिया हैं, हमको जनम… तेरा ही करते हम मंथन

ज्ञान की गंगा में अवगाहन हो, मिलते रहे तेरे पावन चरण

जीवन मेरा, पतित था गुरु… तेरी कृपा से पावन बना 

तेरी दयादृष्टि होवे सदा, प्रभु से मैं यही मांगता…

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या… गुरुवर तेरा ही नाम लिया…

सम्यक्त्व की साधना तुमसे, श्रुत की आराधना तुमसे 

पावन तुमसे रत्नत्रय, धर्म आयतन भी तुमसे 

छत्तीस गुण के धारी हो, जन – जन के उपकारी हो 

जीवन तेरा दर्शन है, स्वाध्याय तप और चिंतन हैं 

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या… गुरुवर तेरा ही नाम लिया…

भक्ति की सुरताल सरगम है, संगीत मुझसे है ही कहा 

कैसे तेरा… गुणगान करूं… वचनों मैं मेरे शक्ति कहां 

तू तो महिमातीत गुरु… कैसे तेरा व्याख्यान करूं…

मंजिल मेरी पथ भी है तू… लाखों तुझे प्रणाम करूं…

मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या… गुरुवर तेरा ही नाम लिया…

तेरा आशीर्वाद हमें… मिलता सुबह और शाम रहा…

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Note

Jinvani.in मे दिए गए सभी Jain Bhajan – मैं क्या… मेरा अस्तित्व क्या स्तोत्र, पुजाये और आरती जिनवाणी संग्रह के द्वारा लिखी गई है, यदि आप किसी प्रकार की त्रुटि या सुझाव देना चाहते है तो हमे Comment कर बता सकते है या फिर Swarn1508@gmail.com पर eMail के जरिए भी बता सकते है। 

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