bhagwan sumatinath

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना – Jain Bhajan

“भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना” एक भावपूर्ण जैन भजन है, जो सच्चे हृदय से प्रभु के चरणों में समर्पण और प्रार्थना को दर्शाता है। इस भजन में साधक सांसारिक सागर में फंसी अपनी आत्मा के लिए प्रभु से करुणा-भरी गुहार लगाता है कि वे उसे इस भवसागर से पार उतार दें।

यह भजन हमें संसार के मोह-माया, कष्ट, और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाने की भावना से जोड़ता है। प्रत्येक पंक्ति में श्रद्धा, विनय, और आत्मसमर्पण झलकता है, जहाँ भक्त अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हुए केवल प्रभु के आश्रय में परमगति प्राप्त करने की आकांक्षा प्रकट करता है।

Jain Bhajan

Talking jinvani

भगवान मेरी नैया, उस पार लगा देना

अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना

हम दिन दुखी निर्धन, नित नाम जपे प्रतिपल

यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नहीं तो कल

जो बाग़ लगाया है फूलो से सजा देना

अब तक तो निभाया…

तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो

मम हँस चुगे मोती, तुम मानसरोवर हो

दो बूंद सुधा रस की, हम को भी पिला देना

Talking jinvani

अब तक तो निभाया…

रोकोगे भला कब तक, दर्शन दो मुझे तुम से

चरणों से लिपट जाऊं, प्रभु शोक लता जैसे

अब द्वार खड़ा तेरे , मुझे राह दिखा देना

Talking jinvani

अब तक तो निभाया है…

मझदार पड़ी नैया डगमग डोले भव में

आओ त्रिशाला नंदन हम ध्यान धरे मन में

अब दस करे विनती, मुझे अपना बना लेना

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना

अब तक तो निभाया है आगे भी निभा देना

golden divider 2

Note

Jinvani.in मे दिए गए सभी Jain Bhajan – भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना स्तोत्र, पुजाये और आरती जिनवाणी संग्रह के द्वारा लिखी गई है, यदि आप किसी प्रकार की त्रुटि या सुझाव देना चाहते है तो हमे Comment कर बता सकते है या फिर Swarn1508@gmail.com पर eMail के जरिए भी बता सकते है। 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top