सम्यग्ज्ञान पूजा – SAMYAK GYAN POOJA

(दोहा) पंच भेद जाके प्रकट, ज्ञेय-प्रकाशन-भान | मोह-तपन-हर चंद्रमा, सोई सम्यक्ज्ञान || ॐ ह्रीं श्री अष्टविधसम्यग्ज्ञान ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ॐ ह्रीं श्री अष्टविधसम्यग्ज्ञान! अत्र तिष्ट तिष्ट ठ: ठ:! (स्थापनम्) ॐ ह्रीं श्री अष्टविधसम्यग्ज्ञान ! अत्र मम सन्निहितो…

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सम्यग्दर्शन पूजा – SAMYAK DARSHAN POOJA

(दोहा) सिद्ध अष्ट -गुणमय प्रगट, मुक्त-जीव-सोपान । ज्ञान चरित जिंह बिन अफल, सम्यक्दर्श प्रधान ।। ॐ ह्रीं श्री अष्टांग सम्यग्दर्शन ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ॐ ह्रीं श्री अष्टांग सम्यग्दर्शन !अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ:! (स्थापनम्) ॐ ह्रीं श्री…

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श्री विष्णुकुमार महामुनि पूजा – Mahamuni Pooja

लावनी छन्द श्री योगी विष्णुकुमार बाल वैरागी, पाई वह पावन ऋद्धि विक्रिया जागी सुन मुनियों पर उपसर्ग स्वयं अकुलाये, हस्तिनापुर वे वात्सल्य-भरे हिय आये || कर दिया दूर सब कष्ट साधना-बल से, पा गये शान्ति सब साधु अग्नि के झुलसे…

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सम्मेदशिखर पूजा – Sammed Shikhar Pooja

पं. जवाहरदास दोहा 'श्रीजिन बीस जिनेश के, बीसों शिखर महान । और असंख्य मुनीश जहँ, पहुँचे शिवपद थान ॥ ॐ ह्रीं सम्मेदशिखरसिद्धक्षेत्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् । ॐ ह्रीं सम्मेदशिखरसिद्धक्षेत्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः । ॐ ह्रीं…

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जैन श्रुतपञ्चमी पूजा || Shrutpanchami Pooja

सरस्वती की पूजा करने, श्री जिनमन्दिर जायेंगे। भव्य भारती की पूजा में, जीवन सफल बनायेंगे| श्रुत के आराधन से मन में, ज्ञान की ज्योति जलायेंगे। पर्यायों को कर विनष्ट हम, निजस्वरूप को पायेंगे॥ अतः करें आह्वान मात का, दृढ़ता हमको…

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पंच मेरु पूजा || Panch Meru Pooja

कविवर ज्ञानतराय गीता छंद तीर्थंकरों के न्हवन जलतें भये तीरथ शर्मदा, तातें प्रदच्छन देत सुर गन पंच मेरुन की सदा | दो जलधि ढाई द्वीप में सब गनत-मूल विराजहीं, पूजौं असी जिनधाम प्रतिमा होहि सुख दुख भाजहीं || ॐ ह्रीं…

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रत्नत्रय पूजा – RATNATRAYA POOJA

कविश्री द्यानतराय (दोहा) चहुँगति-फनि-विष-हरन-मणि, दु:ख-पावक जल-धार | शिव-सुख-सुधा-सरोवरी, सम्यक्-त्रयी निहार || ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ:! (स्थापनम्) ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म!…

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दस लक्षण पूजा – Das Lakshan Pooja

कविवर ज्ञानतराय आडिल्ल उत्तम छिमा मारदव आरजव भाव है, सत्य शौच संयम तप त्याग उपाव हैं | आकिंचन ब्रह्मचर्य धरम दस सार हैं, चहुँगति दुखते काढि मुक्ति करतार हैं || ॐ ह्रीं उत्तम-क्षमा-मार्दव-आर्जव-शौच-सत्य-संयम-तप-त्याग-आकिंचन-ब्रह्मचर्य-आदि-दसलक्षण-धर्माय ! अत्र अवतर अवतर संवौषट ! ॐ…

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नन्दीश्वर द्वीप पूजा – Nandishwar Dweep Pooja

कविश्री द्यानतराय (आडिल्ल छन्द) सरब-परव में बड़ो अठार्इ परव है| नंदीश्वर सुर जाहिं लेय वसु दरब है|| हमें सकति सो नाहिं इहाँ करि थापना| ओं ह्रीं श्रीनंदीश्वरद्वीपे पूर्व-दक्षिण-पश्चिम-उत्तरदिक्षुविद्यमान द्विपंचाशज्जिनालयस्थ जिनप्रतिमासमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ओं ह्रीं श्रीनंदीश्वरद्वीपे पूर्व-दक्षिण-पश्चिम-उत्तरदिक्षुविद्यमान द्विपंचाशज्जिनालयस्थ जिनप्रतिमासमूह!…

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सोलह कारण पूजा || Solah Karan Pooja

कविवर द्यानतराय (अडिल्ल) सोलह कारण भाय तीर्थंकर जे भये | हरषे इन्द्र अपार मेरुपै ले गये || पूजा करि निज धन्य लख्यो बहु चावसौं| हमहू षोडश कारन भावैं भावसौं || ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्धयादि षोडशकारणानि! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ…

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