जैन धर्म की अत्यन्त प्राचीनता सिद्ध करने वाले अनेक उल्लेख साहित्य और विशेषकर पौराणिक साहित्यो में प्रचुर मात्रा में हैं। श्वेतांबर व दिगम्बर जैन पन्थ के दो सम्प्रदाय हैं

Padmavati Mata Aarti Lyrics in Hindi

Jain Padmavati Mata ki Aarti (रागः- जय जय आरति आदिजिणंदा..) देवी पद्मावती आरती तुमारी,  मंगलकारी जय जय कारी…. देवी पद्मावती आरती तुमारी ||1|| पार्श्व प्रभु छे शिरपर ताहरे,  भक्ति करंतां तुं भक्तोने तारे…. देवी पद्मावती आरती तुमारी.. ||2|| उज्जवल वर्णी मूत्ति शुं सोहे, …

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भक्तामर स्तोत्र संस्कृत Bhaktamar Stotra in Sanskrit

Bhaktamar Stotra Sanskrit  की रचना आचार्य मानतुंग जी ने 7वीं शताब्दी मे की थी, आचार्य मानतुंग जी उस समय के प्रसिद्ध राजा भोज के काल में हुए थे। उन्होंने इसकी रचना तब की जब उन्हें राजा ने किसी कारणवश 48 तालों वाली जेल…

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Om Aum Meaning – ॐ का जैन धर्म में अर्थ

ॐ (औम) का जैन धर्म में अर्थ जैन धर्म में "ॐ" (Aum) एक पवित्र ध्वनि और प्रतीक है, जो आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व रखता है। यह मंत्र जैन परंपराओं में गहन अर्थ लिए हुए है और इसे आत्मा की शुद्धता,…

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Jinvani Book: Poojan Paath Pradeep Jinvani Sangrah

जिनवाणी पुस्तक: आत्मज्ञान की ओर एक कदम परिचय भारतीय धर्मों में ज्ञान का स्थान सर्वोपरि रहा है, और जैन धर्म में तो ज्ञान को मोक्ष प्राप्ति का सीधा मार्ग माना गया है। इसी ज्ञान का मुख्य स्रोत है जिनवाणी —…

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Symbol Jainism: जैन धर्म का प्रतीक

जैन धर्म क्या है? इतिहास और तीर्थंकर जैन धर्म की शुरुआत किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं हुई, बल्कि यह एक शाश्वत सत्य (सनातन धर्म) पर आधारित है, जिसे समय-समय पर **तीर्थंकरों** द्वारा प्रकट किया जाता है। 'तीर्थंकर' शब्द का अर्थ है…

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।। पार्श्वनाथाष्टकम् ।। Jain Parshvanath Ashtak

यह रहा पार्श्वनाथाष्टकम् (Parshvanathashtakam) – जो भगवान पार्श्वनाथ (24 में से 23वें तीर्थंकर) को समर्पित एक अत्यंत पवित्र जैन स्तोत्र है। यह स्तोत्र उनके गुणों का स्तवन करता है और भक्ति, शांति एवं मोक्ष की भावना जाग्रत करता है। Parshvanath…

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जैन मंदिरों में चावल (अक्षत) ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए इसके पीछे का आध्यात्मिक रहस्य

Jain Mandir me Chawal kyo Chadhaya Jata hai जब भी आप किसी जैन मंदिर में जाते हैं, तो आपने देखा होगा कि भक्तगण पूजा के समय भगवान के समक्ष चावल या अक्षत चढ़ाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ…

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Shri Sudha Sagar Ji Maharaj ka Jivan Parichay

Muni Pungav 108 Shri Sudha Sagar Ji Maharaj मुनि पुंगव १०८ सुधासागर जी महाराज: त्याग, तपस्या और ज्ञान के प्रकाश स्तंभ भारतीय संत परंपरा, विशेषकर जैन धर्म, ऐसे अनेक महान साधकों से सुशोभित रही है, जिन्होंने अपने जीवन को ज्ञान,…

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Muni Tarun Sagar Ji Maharaj

मुनि तरुण सागर जी महाराज का जीवन और उनके विचार प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उनका जन्म 26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के गुहंजी गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम पवन कुमार जैन था। बचपन…

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Gift Article Ideas for House Warming

Jain Gift Ideas for House Warming: नए घर में सौहार्द और समृद्धि का संदेश नया घर बनाना या खरीदना हर किसी के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, गृह प्रवेश (गृहप्रवेश) एक पवित्र अवसर होता है, जिसमें नए घर…

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दसलक्षण पर्व – उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म🙏 Uttam Brahmcharya

Day 10: दसलक्षण पर्व – Uttam Brahmcharya Dharma 🙏🏼🌸 कामसेवन का मन से, वचन से तथा शरीर से परित्याग करके अपने आत्मा में रमना ब्रह्मचर्य है। संसार में समस्त वासनाओं में तीव्र और दुद्र्वर्ष कामवासना है। इसी कारण अन्य इन्द्रियों…

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Michhami Dukkadam Quotes, Wishes

मिच्छामी दुक्कड़म् एक पवित्र जैन परंपरा है, जिसका अर्थ है – "यदि मैंने जान-बूझकर या अनजाने में किसी को कष्ट पहुँचाया हो, तो मुझे क्षमा करें।" यह वाक्य न केवल क्षमा याचना का प्रतीक है, बल्कि अहिंसा, करुणा और आत्मशुद्धि…

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