जैन धर्म की अत्यन्त प्राचीनता सिद्ध करने वाले अनेक उल्लेख साहित्य और विशेषकर पौराणिक साहित्यो में प्रचुर मात्रा में हैं। श्वेतांबर व दिगम्बर जैन पन्थ के दो सम्प्रदाय हैं
धर्म का श्रेष्ठ लक्षण आर्जव है। आर्जव का अर्थ सरलता है। मन-वचन-काय की कुटिलता का अभाव वह आर्जव है। कपट सभी अनर्थों का मूल है ; प्रीति तथा प्रतीति का नाश करने वाला है। कपटी में असत्य, छल,निर्दयता, विश्वासघात आदि…
जिस व्यक्ति ने अपने मन को निर्लोभी बना लिया है, संतोष धारण कर लिया है, उसका जीवन परम शांति को उपलब्ध हो जाता है जो व्यक्ति उत्तम शौच धर्म को धारण करता है उसकी आत्मा लोभ ओर लालच जैसे मल…
🙏 Uttam Satya Dharma मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है, उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये असत्य बोला करता है। असत्य भाषण करने…
Day 9: Uttam Aakinchanya Dharma🌸🙏 आत्मा के अपने गुणों के सिवाय जगत में अपनी अन्य कोई भी वस्तु नहीं है इस दृष्टि से आत्मा अकिंचन है। अकिंचन रूप आत्मा-परिणति को आकिंचन करते हैं। जीव संसार में मोहवश जगत के सब…
दसलक्षण पर्व में उत्तम त्याग धर्म का विशेष महत्व है, यह जैन धर्म के दस महत्वपूर्ण धर्मों में से एक है, और इसका अर्थ है सभी प्रकार के परिग्रह (सांसारिक वस्तुओं के प्रति आसक्ति) का त्याग करना. Uttam Tyag Dharma…
🔥 उत्तम तप धर्म का अर्थ (Meaning): "तप" का शाब्दिक अर्थ है – तपस्या करना, आत्मा को शुद्ध करना और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना।उत्तम तप धर्म का अभ्यास करने वाला व्यक्ति भोगों से दूर रहकर आत्मा की शुद्धि की ओर…
Uttam Kshama Dharma संसार में प्रत्येक मानव प्राणी के लिए क्षमा रूपी शास्त्र इतना आवश्यक है कि जिनके पास यह क्षमा नहीं होती वह मनुष्य संसार में अपने इष्ट कार्य की सिद्धि नहीं कर सकता है। 🕊️ उत्तम क्षमा धर्म…
🌿 उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ "Uttam Mardav Dharma" का अर्थ है — मृदुता, विनम्रता, अहंकार से रहित भाव।उत्तम मार्दव वह गुण है, जिसमें व्यक्ति अपने ज्ञान, धन, शक्ति या स्थिति के कारण घमंड नहीं करता और सभी के साथ…
दस लक्षण पर्व जैनियों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है। दिगंबर परंपरा में, दस प्रमुख गुण, दशलक्षण धर्म, 10 दिनों तक मनाया जाता है, जो श्वेतांबर परंपरा में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी से शुरू होता है। भाद्रपद सूद…
जैन धर्म एक प्राचीन भारतीय धर्म है जो अहिंसा, सत्य और तप पर जोर देता है। यह सिखाता है कि आध्यात्मिक शुद्धता और ज्ञान का मार्ग हानिरहितता और त्याग के अनुशासित जीवन से होकर जाता है। जैन धर्म के कुछ…
तीर्थंकर भगवान शान्तिनाथ का जीवन परिचय शांतिनाथ(Shantinath) का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हुआ था। तब भरणी नक्षत्र था। उनके पिता का नाम विश्वसेन था, जो हस्तिनापुर के राजा थे और माता का नाम महारानी ऐरा था। जैन ग्रंथो…
तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ का जीवन परिचय कुन्थुनाथ जी(Kunthunath) जैनधर्म के सत्रहवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। पिता का नाम शूरसेन (सूर्य) और माता का नाम श्रीकांता (श्री देवी) था। बिहार में पारसनाथ पर्वत के सम्मेद शिखर पर इन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। प्रभु कुंथुनाथ जी जैन धर्म के 17वें तीर्थंकर…