जैन धर्म की अत्यन्त प्राचीनता सिद्ध करने वाले अनेक उल्लेख साहित्य और विशेषकर पौराणिक साहित्यो में प्रचुर मात्रा में हैं। श्वेतांबर व दिगम्बर जैन पन्थ के दो सम्प्रदाय हैं

Bhagwan Aadinath (ऋषभदेव) जैन धर्म के पहले तीर्थंकर

भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर के पांच कल्याणक होते हैं। भगवान ऋषभनाथ जी को आदिनाथ भी कहा जाता…

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Daslakshan Parva || दस लक्षण पर्व क्या है?

दस लक्षण पर्व क्या है - What is Daslakshan Parva  दशलक्षण पर्व जैनों का सबसे महत्वपूर्ण एवं महान पर्व है। दशलक्षण पर्व हम लोक युगारंभ के उद्देश्य से मनाते है। जब पंचमकाल के बाद इस सृष्टि का प्रलय काल आएगा,…

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