स्तोत्र पाठ धार्मिक आयोजनों, पूजा, व्रत, और त्योहारों के दौरान किया जाता है, और यह धार्मिकता के अनुसरण के एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।स्तोत्र पाठ धार्मिक आयोजनों, पूजा, व्रत, और त्योहारों के दौरान किया जाता है, और यह धार्मिकता के अनुसरण के एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
श्री वर्धमान स्तोत्र भगवान महावीर स्वामी की महिमा का गान करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली और श्रद्धा-पूर्ण स्तोत्र है। यह स्तुति भक्तों को संयम, अहिंसा, सत्य और तप जैसे जैन मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। भगवान वर्धमान, जो कि…
जैन धर्म में २४ तीर्थंकरों का स्मरण करने के लिए अक्सर उनके नाम, गुण और उनसे जुड़ी विशेष पहचानों का उल्लेख किया जाता है। एक सामान्य मंगलाचरण श्लोक इन सभी को एक साथ नमन करता है। कई स्तोत्रों और भजनों…
ॐ नमः सिद्धेभ्यः ॐ जय जय जय नमोऽस्तु ! नमोऽस्तु !! नमोऽस्तु !!! णमो अरहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं ।। ॐ कारं बिन्दुसंयुक्तं, नित्यं ध्यायन्ति योगिनः । कामदं मोक्षदं चैव, ॐकाराय नमो नमः ।। अविरल…
समाधि भक्ति तेरी छत्रच्छाया भगवन्! मेरे शिर पर हो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥ जिनवाणी रसपान करूँ मैं, जिनवर को ध्याऊँ। आर्यजनों की संगति पाऊँ, व्रत-संयम चाहू ॥ गुणीजनों के सद्गुण गाऊँ, जिनवर यह वर दो। मेरा अन्तिम…
स्वस्ति श्री गणनायकं गजमुखम, मोरेश्वरम सिद्धीधम । बल्लाळो मुरुडम विनायकमहम चिन्तामणि स्थेवरम। लेण्याद्री गिरीजात्मकम सुरवरदम विघ्नेश्वरम् ओझरम । ग्रामो रांजण संस्थीतम गणपति। कुर्या सदा मंगलम शुभ मंगल सावधान।।१।। गंगा सिंधु सरस्वतीच यमुना,गोदावरी नर्मदा । कावेरी शरयू महेंद्रतनया शर्मण्वति वेदीका ।…
जैन धर्म निर्वाण कांड (दोहा) वीतराग वन्दौं सदा, भाव सहित सिर नाय| कहूं काण्ड निर्वाण की, भाषा सुगम बनाये || (चौपाई) अष्टापद आदीश्वर स्वामि, वासुपूज्य चम्पापुरि नामि| नेमिनाथ स्वामी गिरनार, वन्दौं भाव भगति उर धार ||1|| चरम तीर्थकर चरम शरीर,…
पार्श्वनाथ स्तोत्र जैन धर्म के बहुत ही प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। इसकी रचना कविश्री द्यानतराय द्वारा की गई है। यह स्तोत्र भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति में लिखा गया है, जो चौबीस जैन तीर्थंकरों में से तेईसवें तीर्थंकर माने…
यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचित:, समं भान्ति ध्रौव्य-व्यय-जनि-लसन्तोन्तरहिता:| जगत्साक्षी मार्ग-प्रकटनपरो भानुरिव यो, महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ||१|| अताम्रं यच्चक्षु: कमल-युगलं स्पन्द-रहितम्, जनान्कोपापायं प्रकटयति बाह्यान्तरमपि| स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी वातिविमला, महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ||२|| नमन्नाकेन्द्राली-मुकुट-मणि-भा-जाल-जटिलम्, लसत्पादाम्भोज-द्वयमिह यदीयं तनुभृताम्| भवज्ज्वाला-शान्त्यै प्रभवति जलं…
मंगलाष्टक स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, शक्तिशाली और प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसका पाठ प्रायः हर शुभ अवसर, विशेष रूप से पंचकल्याणक, तीर्थंकर जन्मोत्सव, और पूजा आयोजनों में किया जाता है। यह स्तोत्र सिर्फ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि…