Bhagwan Sambhavnath(सम्भवनाथ)

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भगवान सम्भवनाथ का जीवन परिचय

भगवान संभवनाथ(Sambhavnath) जी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर थे। इनके पिता का नाम जितारी था तथा माता का नाम सुसेना था, प्रभु का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में मार्गशीर्ष चतुर्दशी को हुआ था।

केवल ज्ञान की प्राप्ति

उन्होंने दीक्षा लेकर मुक्ति के पथ पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया, ओर अपने पुत्र को अपने राज्य का संचालन करने के लिए कहा। हालाँकि शुरू में वह तैयार नहीं थे, लेकिन जब राजा ने जोर दिया तो उनके बेटे ने जिम्मेदारी ली और अपना राज्य उसे सौंप दिया। तब राजा ने श्री स्वयंप्रभा सूरि से दीक्षा ली।

उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी और प्रतिक्रमण करके सभी कषायों से छुटकारा पा लिया और पवित्र हो गये। उन्हें आत्म-साक्षात्कार प्राप्त हुआ। सहेतुक वन में श्रावस्ती नगरी मे भगवान सम्भवनाथ को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। मृत्यु के बाद, उन्होंने नौवें स्वर्ग अनात में पुनर्जन्म लिया।

सम्भवनाथ भगवान का इतिहास

  • भगवान सम्भवनाथ का चिन्ह- उनका चिन्ह घोड़ा है।
  • जन्म स्थान – श्रावस्ती (उत्तर प्रदेश)
  • जन्म कल्याणक – कार्तिक शुक्ला पूर्णिमा
  • केवल ज्ञान स्थान – सहेतुक वन में श्रावस्ती नगरी
  • दीक्षा स्थान – सहेतुक वन में श्रावस्ती नगरी
  • पिता – राजा जितारि
  • माता –सुसेना रानी
  • देहवर्ण- स्वर्ण
  • भगवान का वर्ण- क्षत्रिय (इश्वाकू वंश)
  • लंबाई/ ऊंचाई-४०० धनुष (१२०० मीटर)
  • आयु- ६०,००,००० पूर्व
  • वृक्ष- शालवृक्ष
  • यक्ष –त्रिमुख
  • यक्षिणी –प्रज्ञप्ती देवी
  • प्रथम गणधर –श्री चारूदत्त जी
  • गणधरों की संख्या – 105

🙏 सम्भवनाथ का निर्वाण

सम्भवनाथ जिन वर्तमान काल के तीसरे तीर्थंकर है, भगवान संभवनाथ जी ने सम्मेद शिखरजी मे अपने समस्त घनघाती कर्मो का क्षय कर निर्वाण प्राप्त किया और सिद्ध कहलाये। प्रभु का निर्वाण चैत्र सुदी 6 को हुआ था, भगवान संभवनाथ जी के प्रथम शिष्य का नाम चारूदत तथा प्रथम शिष्या का नाम श्यामा था। प्रभु के प्रथम गणधर चारूजी थे।

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Note

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Swarn Jain

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