निर्ग्रंथों का मार्ग हमको प्राणों से भी प्यारा है – Bhajan

Acharya shri Vidhyasagar ji maharaj

“निर्ग्रंथों का मार्ग हमको प्राणों से भी प्यारा है” एक प्रबल वैराग्य और आत्मिक प्रेरणा से युक्त जैन भजन है, इस भजन में गायक यह भाव प्रकट करता है कि मोक्षमार्ग पर चलने वाले निर्ग्रंथ मुनिराजों का जीवन हमें इतना प्रिय है कि हम उसके लिए अपने प्राणों का भी त्याग कर सकते हैं।

यह मार्ग तप, त्याग, संयम, और समता का मार्ग है, जो आत्मा को कर्मों के जाल से मुक्त कर सच्चे कल्याण की ओर ले जाता है। अपने जीवन में संयम, श्रद्धा और भक्ति को अपनाना चाहते हैं। यह हमें सिखाता है कि संसार के सुख क्षणिक हैं, पर आत्मा का कल्याण चिरस्थायी है — और निर्ग्रंथ मार्ग वही साधन है जो इस लक्ष्य तक पहुँचाता है।

Jain Bhajan Lyrics

निर्ग्रंथों का मार्ग हमको प्राणों से भी प्यारा है…
दिगम्बर वेश न्यारा है… निर्ग्रंथों का मार्ग….॥

शुद्धात्मा में ही, जब लीन होने को, किसी का मन मचलता है,
तीन कषायों का, तब राग परिणति से, सहज ही टलता है,
वस्त्र का धागा….वस्त्र का धागा नहीं फ़िर उसने तन पर धारा है,
दिगम्बर वेश न्यारा है… निर्ग्रंथों का मार्ग….॥

पंच इंद्रिय का, निस्तार नहीं जिसमें,वह देह ही परिग्रह है,
तन में नहीं तन्मय, हैदृष्टि में चिन्मय, शुद्धात्मा ही गृह है,
पर्यायों से पार…पर्यायों से पार त्रिकाली ध्रुव का सदा सहारा है,
दिगम्बर वेश न्यारा है… निर्ग्रंथों का मार्ग….॥

मूलगुण पालन, जिनका सहज जीवन, निरन्तर स्व-संवेदन,
एक ध्रुव सामान्य में ही सदारमते, रत्नत्रय आभूषण,
निर्विकल्प अनुभव…निर्विकल्प अनुभव से ही जिनने निज को श्रंगारा है,
दिगम्बर वेश न्यारा है… निर्ग्रंथों का मार्ग….॥

आनंद के झरने, झरते प्रदेशों से, ध्यान जब धरते हैं,
मोह रिपु क्षण में, तब भस्म हो जाता, श्रेणी जब चढते हैं,
अंतर्मुहूर्त मे…अंतर्मुहूर्त में ही जिनने अनन्त चतुष्टय धारा है,
दिगम्बर वेश न्यारा है… निर्ग्रंथों का मार्ग….॥

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Note

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Swarn Jain

My name is Swarn Jain, A blog scientist by the mind and a passionate blogger by heart ❤️, who integrates my faith into my work. As a follower of Jainism, I see my work as an opportunity to serve others and spread the message of Jainism.

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