जैन पूजा विधि प्रारम्भ – Pooja Vidhi

Jain Puja की सामग्री १. प्रासुक जल (कुंए या बोरिंग का जल आवश्यक मात्रा में एक बड़े बर्तन में, दोहरे छन्ने से छान कर, जिवाणि वापिस कुएं में डालें, छने पानी को गर्म करके पुनः ठंडा होने छोड़ दें| (पानी गर्म करने की सुविधा न…

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Muni Tarun Sagar Ji Maharaj

मुनि तरुण सागर जी महाराज का जीवन और उनके विचार प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उनका जन्म 26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के गुहंजी गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम पवन कुमार जैन था। बचपन…

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Gift Article Ideas for House Warming

Jain Gift Ideas for House Warming: नए घर में सौहार्द और समृद्धि का संदेश नया घर बनाना या खरीदना हर किसी के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, गृह प्रवेश (गृहप्रवेश) एक पवित्र अवसर होता है, जिसमें नए घर…

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Padmastakam Stotra (Padamprabhu Bhagwan)

श्री 108 साध्य सागर जी महाराज द्वारा रचित मुनि श्री 108 साध्य सागर जी महाराज का जन्म 1987 को मध्य प्रदेश के उज्जैन मे हुआ था। महाराज जी ने बहुत सी रचनाए की है, जिनमे से पद्माष्टकम् स्तोत्र मुख्य है।…

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Shri Namokar Mantra Chalisa णामोकार चालीसा

णमोकार मंत्र चालीसा जैन धर्म के परम पवित्र मंत्र, णमोकार मंत्र, की महिमा और प्रभाव को विस्तार से समझाने वाला एक स्तोत्र है। यह चालीसा भगवान, आचार्य, उपाध्याय, और साधुओं के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करती है। णमोकार मंत्र,…

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श्री पद्मावती माता चालीसा: Padmavati Chalisa

श्री पद्मावती माता चालीसा जैन धर्म में पूज्य देवी पद्मावती देवी को समर्पित एक भक्ति भजन है। उन्हें जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की रक्षक देवी (यक्षिणी) माना जाता है। जो लोग उनके गुणों की प्रशंसा करते हैं। …

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Jinvani Stuti जिनवाणी स्तुति

 जिनवाणी स्तुति जैन धर्म की पवित्र वाणी के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का माध्यम है। इसमें जिनवाणी को सत्य, ज्ञान, और मोक्ष का मार्गदर्शन करने वाली परम पवित्र शक्ति माना गया है। जिनवाणी की स्तुति से मन शुद्ध…

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Shri Parshvanath Stuti श्री पार्श्वनाथ स्तुति

पारसनाथ स्तुति जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। भगवान पार्श्वनाथ ने चार मुख्य व्रतों—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, और अपरिग्रह—का प्रचार किया, जो जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत हैं।…

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दसलक्षण पर्व – उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म🙏 Uttam Brahmcharya

Day 10: दसलक्षण पर्व – Uttam Brahmcharya Dharma 🙏🏼🌸 कामसेवन का मन से, वचन से तथा शरीर से परित्याग करके अपने आत्मा में रमना ब्रह्मचर्य है। संसार में समस्त वासनाओं में तीव्र और दुद्र्वर्ष कामवासना है। इसी कारण अन्य इन्द्रियों…

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Michhami Dukkadam Quotes, Wishes

मिच्छामी दुक्कड़म् एक पवित्र जैन परंपरा है, जिसका अर्थ है – "यदि मैंने जान-बूझकर या अनजाने में किसी को कष्ट पहुँचाया हो, तो मुझे क्षमा करें।" यह वाक्य न केवल क्षमा याचना का प्रतीक है, बल्कि अहिंसा, करुणा और आत्मशुद्धि…

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Shri Vardhman Stotra – श्री वर्धमान स्तोत्र

श्री वर्धमान स्तोत्र भगवान महावीर स्वामी की महिमा का गान करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली और श्रद्धा-पूर्ण स्तोत्र है। यह स्तुति भक्तों को संयम, अहिंसा, सत्य और तप जैसे जैन मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। भगवान वर्धमान, जो कि…

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आरती श्री आचार्य विद्यासागर जी- Aarti Shree Vidyasagar Maharaj Ji

Acharya Shree Vidyasagar Ji Maharaj दिगम्बर जैन समाज के एक अत्यंत पूजनीय और आध्यात्मिक गुरु हैं, जिनका जीवन त्याग, तपस्या और ज्ञान का प्रतीक है। उनके अद्वितीय व्यक्तित्व, गहन विचारों और समाज सेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें लाखों श्रद्धालुओं…

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