स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार…Jain Bhajan
"स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार..." एक अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से भरपूर जैन भजन है, जो जिनेंद्र भगवान के दिव्य दरबार की महिमा का गायन करता है। इस भजन में भक्त यह अनुभव करता है कि…
"स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार..." एक अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से भरपूर जैन भजन है, जो जिनेंद्र भगवान के दिव्य दरबार की महिमा का गायन करता है। इस भजन में भक्त यह अनुभव करता है कि…
"जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड़ सकता है..." एक गहरा और आत्म-जागृति से भरा जैन भजन है, जो जीवन की अनिश्चितता और आत्मकल्याण की तात्कालिक आवश्यकता का स्मरण कराता है। इस भजन को विशेष रूप से वैराग्य दिवस,…
"ओ जगत के शांति दाता..." न केवल भक्ति का गीत है, एक अत्यंत भावविभोर करने वाला जैन भजन है, जिसमें भक्त भगवान जिनेंद्रदेव को संपूर्ण जगत के शांति दाता के रूप में स्मरण करता है। यह भजन प्रभु की करुणा,…
Guru Ne Jahan Jahan bhi Jyoti Jalai hai..." एक अत्यंत प्रेरणादायक और श्रद्धा से भरा हुआ जैन भजन है, जो सद्गुरु की कृपा, मार्गदर्शन और आत्मिक प्रकाश की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। जहाँ-जहाँ गुरु की वाणी पहुँची है, वहाँ…
"मोक्ष के प्रेमी हमने, कर्मों से लड़ते देखें..." एक प्रेरणादायक Jain Bhajan है, जो उन महापुरुषों की महान साधना और तपस्या का स्मरण कराता है जिन्होंने आत्मा की मुक्ति के लिए कठिन से कठिन कर्मों से टक्कर ली। यह भजन…
"साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते चल रे राही चल..." एक अत्यंत प्रेरणादायक जैन भजन है, जो आत्मा को उसके असली लक्ष्य — मोक्ष — की ओर बढ़ने के लिए जाग्रत करता है। यह भजन जीवन के भ्रमित रास्तों से…
"जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है..." एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण जैन भजन है, जो तीर्थराज गिरनार पर्वत और भगवान नेमिनाथ की दिव्य साधना का गौरवगान करता है। इस भजन के माध्यम से श्रद्धालु गिरनार की उस…
"व्हाला आदिनाथ मे तो पकड़्यो तारो हाथ..." एक अत्यंत मधुर और आत्मा को छू लेने वाला जैन भजन है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भरोसे को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपने…
तेरी छत्रच्छाया भगवन्! मेरे शिर पर हो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥ जिनवाणी रसपान करूँ मैं, जिनवर को ध्याऊँ। आर्यजनों की संगति पाऊँ, व्रत-संयम चाहू ॥ गुणीजनों के सद्गुण गाऊँ, जिनवर यह वर दो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे…
"समाधि भक्ति" इसी गहन आध्यात्मिक अवस्था का वर्णन करती है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच की दूरी मिट जाती है। यह मात्र पूजा-पाठ या स्तुति से कहीं बढ़कर है; यह दिव्य प्रेम में पूर्ण तल्लीनता की स्थिति है। संस्कृत…
जैन धर्म में २४ तीर्थंकरों का स्मरण करने के लिए अक्सर उनके नाम, गुण और उनसे जुड़ी विशेष पहचानों का उल्लेख किया जाता है। एक सामान्य मंगलाचरण श्लोक इन सभी को एक साथ नमन करता है। कई स्तोत्रों और भजनों…
"आत्मा अनंत गुणों का धनी" एक अत्यंत प्रेरणादायक जैन भजन है, जो आत्मा की वास्तविक महिमा और उसकी दिव्यता को उजागर करता है। यह भजन हमें यह स्मरण कराता है कि हमारी आत्मा कोई साधारण तत्व नहीं, बल्कि वह अनंत…