जैन पूजा करने के विधि – Jain Pooja Krne ki Vidhi
Jain Pooja Krne ki Vidhi जैन पूजा सामग्री प्रासुक जल (कुंए या बोरिंग का जल आवश्यक मात्रा में एक बड़े बर्तन में, दोहरे छन्ने से छान कर पानी को गर्म करके पुनः ठंडा होने छोड़ दें| (पानी गर्म करने की…
पूजा एक धार्मिक आदर व्यक्त करने का एक धार्मिक आयोजन होता है जो भगवान, देवी-देवताओं, गुरु, या किसी पवित्र वस्तु की प्रतिमा, मूर्ति, के सामने किया जाता है
Jain Pooja Krne ki Vidhi जैन पूजा सामग्री प्रासुक जल (कुंए या बोरिंग का जल आवश्यक मात्रा में एक बड़े बर्तन में, दोहरे छन्ने से छान कर पानी को गर्म करके पुनः ठंडा होने छोड़ दें| (पानी गर्म करने की…
Jain Puja की सामग्री १. प्रासुक जल (कुंए या बोरिंग का जल आवश्यक मात्रा में एक बड़े बर्तन में, दोहरे छन्ने से छान कर, जिवाणि वापिस कुएं में डालें, छने पानी को गर्म करके पुनः ठंडा होने छोड़ दें| (पानी गर्म करने की सुविधा न…
श्री 108 साध्य सागर जी महाराज द्वारा रचित मुनि श्री 108 साध्य सागर जी महाराज का जन्म 1987 को मध्य प्रदेश के उज्जैन मे हुआ था। महाराज जी ने बहुत सी रचनाए की है, जिनमे से पद्माष्टकम् स्तोत्र मुख्य है।…
स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण (दमन, कन्ट्रोल) करना इन्द्रिय-संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है इन दोनों संयमों में इन्द्रिय संयम मुख्य है क्योंकि इन्द्रिय संयम प्राणी…
श्री सम्मेद शिखर जी जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ स्थल है, जहाँ 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। इन दिव्य स्थलों पर स्थित ‘टोंके’ उन पावन स्थानों को दर्शाते हैं जहाँ तीर्थंकरों ने अंतिम साधना की थी। "श्री सम्मेद…
श्री गौतम गणधर पूजा जैन धर्म में अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाने वाली एक महत्वपूर्ण उपासना है। इस पूजा में हम भगवान महावीर स्वामी के प्रथम गणधर श्री गौतम स्वामी के महान व्यक्तित्व, गहन ज्ञान और अद्वितीय गुरु-भक्ति को…
(अडिल्ल छन्द) ह्रूं कार अक्षरात्मक देव जो ध्यावते | देव मनुष्य पशु कृत सो व्याधि नशावते || कांसी तांबे पत्र पे शुद्ध लिखावते | केशर चंदन तापर गंध रचावते || (दोहा) ऐसे अनुपम-यंत्र को, मन वच काय संभार | जे…
कविश्री 'पुष्पेंदु' हे पार्श्वनाथ! हे अश्वसेन-सुता! करुणासागर तीर्थंकर हे सिद्धशिला के नेता! हे ज्ञान-संपन्न तीर्थंकर || हम भावुकता से भर गए, तुम्हारे नाथ! बुलाया भगवान! गाथा की गंगा से, तुमाने कितनों को तारा है || हम द्वार तुम्हारे आये हैं,…
(कविवर ज्ञानतराय जी) परमपूज्य चौबीस, जिहँ जिहँ थानक शिव गये| सिद्धभूमि निशदीस, मन-वच-काय पूजा करों| ॐ ह्रीं श्रीचतुर्विंशति तीर्थंकर निर्वाणक्षेत्रा:! अत्र अवतर अवतर संवौषट आह्वाह्न्म | ॐ ह्रीं श्रीचतुर्विंशति तीर्थंकर निर्वाणक्षेत्रा:! अत्र तिष्ठ: ठ: ठ: स्थापनम| ॐ ह्रीं श्रीचतुर्विंशति तीर्थंकर…
Panch Baalyati Tirthankar Pooja Lyrics (दोहा) श्री जिन पंच अनंग-जित, वासुपूज्य मल्लि नेम | पारसनाथ सु वीर अति, पूजूँ चित-धरि प्रेम || ओं ह्रीं श्री पंचबालयति-तीर्थंकरा: अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ओं ह्रीं श्री पंचबालयति-तीर्थंकरा: अत्र तिष्ट तिष्ट ठ: ठ:!…
दोहा बंदौ श्री भगवान् को, भाव भगति सिर नाय । पूजा श्री निर्वाण की, सिद्धक्षेत्र सुखदाय ।।१।। द्वीप अढाई के विषै, सिद्धक्षेत्र को जान। तिनको मैं वंदन करौं, भव भव होइ सहाय।।२।। अथ स्थापना (अडिल्ल छन्द) परम महा उत्कृष्ट मोक्ष…
चौबिस जिनपद प्रथम नमि, दुतिय सुगणधर पाय। त्रितिय पंच परमेष्ठि को, चौथे शारद माय।। मन वच तन ये चरन युग, करहुँ सदा परनाम। ऋषि मण्डल पूजा रचों, बुधि बल द्यो अभिराम।। -अडिल्ल छंद- चौबिस जिन वसु वर्ग पंच गुरु जे…