पूजा एक धार्मिक आदर व्यक्त करने का एक धार्मिक आयोजन होता है जो भगवान, देवी-देवताओं, गुरु, या किसी पवित्र वस्तु की प्रतिमा, मूर्ति, के सामने किया जाता है

सिद्ध पूजा (भाषा) द्यानतराय || Siddha Puja

(पं. द्यानतराय) परमब्रह्म परमातमा, परमज्योति 'परमेश । परम निरंजन परम शिव, नमो परम सिद्धेश ॥         ॐ ह्रीं सिद्धचक्राधिपते सिद्धपरमेष्ठिन् अत्र अवतर अवतर संवौषट् । ॐ ह्रीं सिद्धचक्राधिपते सिद्धपरमेष्ठिन् अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः । ॐ ह्रीं…

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बीस तीर्थंकर पूजा (दीप अढ़ाई मेरु) || Bees Tirthankar Puja

पं. द्यानतराय दीप अढ़ाई मेरु पन 'अब तीर्थंकर बीस । तिन सबकी पूजा करूँ मन वच तन धरि शीस ॥ ॐ ह्रीं श्रीविद्यमानविंशतितीर्थङ्कराः ! अत्र अवतरत अवतरत संवौषट् । ॐ ह्रीं श्रीविद्यमानविंशतितीर्थङ्कराः ! अत्र तिष्ठत तिष्ठत ठः ठः । ॐ…

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जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? (Jain Raksha Bandhan)

जय जिनेंद्र मित्रों आज हम बात करेंगे जैन धर्म में रक्षाबंधन के महत्व की, जैन धर्म में रक्षाबंधन का क्या महत्व है जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? और क्या जैन धर्म में भी यह भाई के द्वारा…

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Diwali Poojan – दिवाली पूजा

जैन मत में दीपावली के पावन पर्व पर धन-लक्ष्मी की बजाए ज्ञान-लक्ष्मी या वैराग्य-लक्ष्मी का पूजन अतिमहत्वपूर्ण माना गया है। इसके पीछे प्रमुख एवं मूलभूत कारण यह है कि दीपावली अर्थात कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पश्चात अमावस्या की प्रातः स्वाति…

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भक्तामर स्तोत्र की महिमा || BHAKTAMAR MAHIMA ||

पं. हीरालाल जैन ‘कौशल’ श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रातः। भक्ति मन लाई, सब संकट जाये नशाई॥ जो ज्ञान-मान-मतवारे थे, मुनि मानतुंग से हारे थे। उन चतुराई से नृपति लिया, बहकाई ॥ सब ॥१॥ मुनि जी को नृपति बुलाया…

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जैन स्तुति पाठ – Stuti Paath

तुम तरणतारण भवनिवारण भविक मन आनन्दनो। श्रीनाभिनन्दन जगतवंदन आदिनाथ निरञ्जनो॥१॥ तुम आदिनाथ अनादि सेऊँ सेय पद पूजा करूँ। कैलाशगिरि पर रिषभ जिनवर पदकमल हिरदै धरूं॥२॥ तुम अजितनाथ अजीत जीते अष्टकर्म महाबली। यह विरद सुनकर सरन आयो कृपा कीज्यो नाथजी॥३॥ तुम…

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विसर्जन पाठ(हिन्दी) – Visarjan Paath

दोहा बिन जाने वा जानके, रही टूट जो कोय। तुम प्रसाद तैं परमगुरु, सो सब पूरन होय॥ पूजनविधि जानूँ नहीं, नहिं जानूँ आह्वान। और विसर्जन हू नहीं, क्षमा करहु भगवान॥ मन्त्रहीन धनहीन हूँ, क्रियाहीन जिनदेव। क्षमा करहु राखहु मुझे, देहु…

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श्री पंच परमेष्ठी पूजा (णमोकारमंत्रव्रतसहित्) | Shri Panch Parmesthi Puja

समपदी चौपाई अरिहंतों को नमन हमारा, सिद्ध चक्र का जय-जयकारा । आचार्यों को वंदन प्यारा, पाठक मुनि का अर्चन न्यारा आह्वानन कर हृदय बिठाना, सन्निधि पाकर पूज रचाना। णमोकार व्रत एक सहारा, पापों से मिलता छुटकारा ओं ह्रीं णमोकारमंत्रस्थित –अर्हत्सिद्धाचार्योपाध्यायसर्वसाधुसमूह!…

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णामोकार महामंत्र पूजा || Namokar MahaMantra Puja

https://youtu.be/GpzCi6coTdE आर्यिका ज्ञानमति माता जी गीता छन्दअनुपम अनादि अनंत है, यह मंत्रराज महान् है |सब मंगलों में प्रथम मंगल, करता अघ की हान है ||अरिहन्त सिद्धाचार्य पाठक, साधुओं की वंदना |इस शब्दमय परब्रह्म को, थापूँ करूँ नित अर्चना ||१||  …

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देव शास्त्र गुरु पूजा – 1 || Dev Shastra Guru Puja

जिनगीतिका शुचि ध्यान से  त्रेसठ  प्रकृति  हन,  वीतरागी हो गये, दृग ज्ञान सुख वीरज चतुष्टय, गुण अनंत  निजी  लिये। तीर्थेश बन उपदेश दे, अनगिन भविक निज सम किये, जिनदेव  श्रुत  गुरु  बोध  डालो, आज  मेरे  भी  हिये ॥ ओं ह्रीं…

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श्री देव शास्त्र गुरु पूजा || Dev Shastra Guru Pooja

Jain Pooja Dev Shastra Guru केवल-रवि किरणों से जिसका, सम्पूर्ण प्रकाशित है अन्तर, उस श्री जिनवाणी में होता, तत्त्वों का सुंदरतम दर्शन । सद्दर्शन-बोध-चरण-पथ पर, अविरल जो बढ़ते हैं मुनिगण, उन देव परम आगम गुरु को, शत शत वंदन शत…

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देवशास्त्र गुरु पूजन(प्रथम देव अरहंत) || Dev Shastra Guru Pujan

पं. द्यानतराय अडिल्ल प्रथम देव अरहंत सुश्रुत सिद्धान्त जू गुरु निर्ग्रथ महंत मुकतिपुर-पंथ जू । तीन रतन जगमाँहिं सु "ये भवि ध्याइये, तिनकी भक्ति प्रसाद परम पद पाइये ॥ दोहा पूजों पद अरहंत के, पूजों गुरुपद सार । पूजों देवी…

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