श्री निर्वाण क्षेत्र लड्डू पूजा – Nirvan Laddu Pooja
दोहा बंदौ श्री भगवान् को, भाव भगति सिर नाय । पूजा श्री निर्वाण की, सिद्धक्षेत्र सुखदाय ।।१।। द्वीप अढाई के विषै, सिद्धक्षेत्र को जान। तिनको मैं वंदन करौं, भव भव…
दोहा बंदौ श्री भगवान् को, भाव भगति सिर नाय । पूजा श्री निर्वाण की, सिद्धक्षेत्र सुखदाय ।।१।। द्वीप अढाई के विषै, सिद्धक्षेत्र को जान। तिनको मैं वंदन करौं, भव भव…
चौबिस जिनपद प्रथम नमि, दुतिय सुगणधर पाय। त्रितिय पंच परमेष्ठि को, चौथे शारद माय।। मन वच तन ये चरन युग, करहुँ सदा परनाम। ऋषि मण्डल पूजा रचों, बुधि बल द्यो…
पूज्य अकम्पन साधु-शिरोमणि, सात-शतक मुनि ज्ञानी | आ हस्तिनापुर के कानन में, हुए अचल दृढ़- ध्यानी ||१|| दु:खद सहा उपसर्ग भयानक, सुनकर मानव घबराये | आत्म-साधना के साधक वे, तनिक…
कवि श्री मनरंगलाल (छप्पय छन्द) प्रथम नाम श्रीमन्व दुतिय स्वरमन्व ऋषीश्वर | तीसर मुनि श्रीनिचय सर्वसुन्दर चौथो वर || पंचम श्रीजयवान विनयलालस षष्ठम भनि | सप्तम जयमित्राख्य सर्व चारित्र-धाम गनि…
कविश्री वृन्दावनदास (मत्त-गयंद छन्द) श्रीमत वीर हरें भव-पीर, भरें सुख-सीर अनाकुलताई | केहरि-अंक अरीकर-दंक, नयें हरि-पंकति-मौलि सुहाई || मैं तुमको इत थापत हूं प्रभु! भक्ति-समेत हिये हरषाई | हे करुणा-धन-धारक…
सहस्रार दिवि त्यागि, नगर कम्पिला जनम लिय| कृतधर्मानृपनन्द, मातु जयसेना धर्मप्रिय || तीन लोक वर नन्द, विमल जिन विमल विमलकर| थापौं चरन सरोज, जजन के हेतु भाव धर|| ॐ ह्रीं…
पुष्पोत्तर तजि नगर अजुध्या जनम लियो सूर्या उर आय, सिंघसेन नृप के नन्दन, आनन्द अशेष भरे जगराय| गुन अंनत भगवंत धरे, भवदंद हरे तुम हे जिनराय, थापतु हौं त्रय बार…
तजि के सरवारथसिद्धि विमान, सुभान के आनि आनन्द बढ़ाये| जगमात सुव्रति के नन्दन होय, भवोदधि डूबत जंतु कढ़ाये|| जिनके गुन नामहिं प्रकाश है, दासनि को शिवस्वर्ग मँढ़ाये| तिनके पद पूजन…