दीपावली-पूजन -विधि (Depawali Pujan Vidhi)

जैन धर्म के अनुसार दीपावली विधि अनादि अनंत काल से भरतक्षेत्र में अनंत चौबीसी के तीर्थंकर अनंत- अनंत काल से होते आए हैं, इसी क्रम में इस युग में भी ऋषभनाथ से लेकर महावीर पर्यन्त चौबीस तीर्थंकर हुए। तेइसवें तीर्थंकर…

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चौसठ ऋद्धि अर्घ्य (चौसठ अर्घ्य चढ़ावें) – Chausath Riddhi Arghya

ॐ ह्रीं अवधिज्ञानबुद्धिऋद्धये नमः अर्घ्यं नि. स्वाहा । ॐ ह्रीं मनः पर्ययज्ञानबुद्धिऋद्धये नमः अर्घ्यं नि. स्वाहा । ॐ ह्रीं केवलज्ञानबुद्धिऋद्धये नमः अर्घ्यं नि. स्वाहा । ॐ ह्रीं बीजबुद्धिऋद्धये नमः अर्घ्यं नि. स्वाहा । ॐ ह्रीं कोष्ठज्ञानबुद्धिऋद्धये नमः अर्घ्यं नि. स्वाहा…

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सम्मेदशिखर पूजा – Sammed Shikhar Pooja

पं. जवाहरदास दोहा 'श्रीजिन बीस जिनेश के, बीसों शिखर महान । और असंख्य मुनीश जहँ, पहुँचे शिवपद थान ॥ ॐ ह्रीं सम्मेदशिखरसिद्धक्षेत्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् । ॐ ह्रीं सम्मेदशिखरसिद्धक्षेत्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः । ॐ ह्रीं…

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प्रत्येक टोंक के अर्घ्य – पच्चीस टोंक के अर्घ्य

जैन धर्म में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व है, और शिखर जी तीर्थ उन पवित्र स्थलों में सर्वोच्च स्थान रखता है जहाँ अनगिनत साधक आत्मकल्याण की राह पर अग्रसर हुए हैं। यह पर्वत स्थान केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि…

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श्री गिरनार पूजा || Shri Girnar Pooja

दोहा बंदौं नेमि जिनेश पद, नेमि-धर्म-दातार । नेम धुरंधर परम गुरु, भविजन सुख कर्तार ||१|| जिनवाणीको प्रणम कर, गुरु गणधर उर धार । सिद्धक्षेत्र पूजा रचौं, सब जीवन हितकार ॥२॥ उर्जयंतगिरि नाम तस, कह्यो जगत विख्यात । गिरिनारी तासें कहत,…

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श्री कैलासगिरि पूजा || Shri Kailas Giri Pooja

रोला छन्द श्री कैलाश पहाड़ जगत परधान कहा। आदिनाथ भगवान जहां शिववास लहा है। नागकुमार महाबाल व्याल आदि मुनिराई। गये तिहिं गिरिसों मोक्ष थाप पूजों शिर नाई|| दोहा - श्री कैलाश पहाड़ सों आदिनाथ जिनदेव। मुनी आदि जे शिव गये,…

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जैन श्रुतपञ्चमी पूजा || Shrutpanchami Pooja

सरस्वती की पूजा करने, श्री जिनमन्दिर जायेंगे। भव्य भारती की पूजा में, जीवन सफल बनायेंगे| श्रुत के आराधन से मन में, ज्ञान की ज्योति जलायेंगे। पर्यायों को कर विनष्ट हम, निजस्वरूप को पायेंगे॥ अतः करें आह्वान मात का, दृढ़ता हमको…

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पंच मेरु पूजा || Panch Meru Pooja

कविवर ज्ञानतराय गीता छंद तीर्थंकरों के न्हवन जलतें भये तीरथ शर्मदा, तातें प्रदच्छन देत सुर गन पंच मेरुन की सदा | दो जलधि ढाई द्वीप में सब गनत-मूल विराजहीं, पूजौं असी जिनधाम प्रतिमा होहि सुख दुख भाजहीं || ॐ ह्रीं…

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रत्नत्रय पूजा – RATNATRAYA POOJA

कविश्री द्यानतराय (दोहा) चहुँगति-फनि-विष-हरन-मणि, दु:ख-पावक जल-धार | शिव-सुख-सुधा-सरोवरी, सम्यक्-त्रयी निहार || ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वाननम्) ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ:! (स्थापनम्) ॐ ह्रीं श्री सम्यक् रत्नत्रय धर्म!…

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दस लक्षण पूजा – Das Lakshan Pooja

कविवर ज्ञानतराय आडिल्ल उत्तम छिमा मारदव आरजव भाव है, सत्य शौच संयम तप त्याग उपाव हैं | आकिंचन ब्रह्मचर्य धरम दस सार हैं, चहुँगति दुखते काढि मुक्ति करतार हैं || ॐ ह्रीं उत्तम-क्षमा-मार्दव-आर्जव-शौच-सत्य-संयम-तप-त्याग-आकिंचन-ब्रह्मचर्य-आदि-दसलक्षण-धर्माय ! अत्र अवतर अवतर संवौषट ! ॐ…

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जलाभिषेक वा प्रक्षाल-पाठ || Jalabhishek Path

https://youtu.be/4SYHwI_ORrI जय-जय भगवंते सदा, मंगल मूल महान।वीतराग सर्वज्ञ प्रभु,नमौ जोरि जुगपान।। (ढाल मंगल की,छंद अडिल्ल और गीता) श्रीजिन जगमें ऐसो को बुधवंत जू। जो तुम गुण वरननि करि पावै अंत जू।।इंद्रादिक सुर चार ज्ञानधारी मुनी।कहि न सकै तुम गुणगण हे…

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नित्य पूजा पीठिका | Nitya Puja Pithika

नित्य पूजा पीठिका ॐ जय जय जय नमोऽस्तु नमोऽस्तु नमोऽस्तु । णमो अरहंताणं, णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं,   णमो  लोए  सव्व साहूणं॥ "चत्तारि मंगलं अरहंत मंगलं सिद्ध मंगलं साहु मंगलं                  …

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