व्हाला आदिनाथ मे तो पकडयो तारो हाथ (Jain Bhajan)

adinath bhagwan rishabhdev

“व्हाला आदिनाथ मे तो पकड़्यो तारो हाथ…” एक अत्यंत मधुर और आत्मा को छू लेने वाला जैन भजन है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भरोसे को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपने जीवन के संघर्षों और मोह-जाल से थककर प्रभु आदिनाथ का हाथ थाम लेने की भावना व्यक्त करता है — एक ऐसा हाथ जो उसे संसार के अंधकार से निकालकर मोक्ष के प्रकाश की ओर ले जाए।

यह भजन विशेष रूप से आदिनाथ प्रभु की पूजन, भक्ति कार्यक्रमों, और आत्मिक ध्यान के समय भाव-विभोर होकर गाया जाता है, जब साधक खुद को प्रभु की शरण में सौंप देता है।

Bhagwan Adinath Jain Bhajan

व्हाला आदिनाथ में तो पकड्यो तारो हाथ,
मने देजो सदा साथ.. हो.. व्हाला आदिनाथ हो
आव्यो तुम पास.. लइ मुक्तिनी एक आश,
मने करशो ना निराश..
हो.. व्हाला आदिनाथ हो… (१)
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तारा दर्शनथी मारा नयनो ठरे छे..
नयनो ठरे छे,
रोमे रोमे आ मारा पुलकित बने छे..
पुलकित बने छे,
भवोभवनो मारो उतरे छे थाक,
हुं तो पामुं हळवाश,
हो… व्हाला आदिनाथ हो… (२)
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तारी वाणीथी मारुं मनडुं ठरे छे…
मनडुं ठरे छे,
कर्मवर्गणा मारी क्षण क्षण खरे छे…
क्षण क्षण खरे छे,
ठरी जाय छे मारा कषायोनी आग,
छूटे राग-द्वेष नी गांठ,
हो… व्हाला आदिनाथ हो… (३)
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तारा आज्ञाथी मारुं हैयुं ठरे छे…
हैयुं ठरे छे,
तुज पंथे आगळ वधवा सत्त्व मळे छे…
सत्त्व मळे छे,
टळी जाय छे मारो मोह अंधकार,
खीले ज्ञान अजवाश,
हो… व्हाला आदिनाथ हो… (४)
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तारुं शासन पामीने आतम ठरे छे…
आतम ठरे छे,
मोक्ष मार्गमां ए तो स्थिर बने छे…
स्थिर बने छे,
मळ्यो तारो मार्ग, मारा केवा सद्भाग्य,
मारा केवा धन्यभाग्य,
हो… व्हाला आदिनाथ हो… (५)
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Note

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Swarn Jain

My name is Swarn Jain, A blog scientist by the mind and a passionate blogger by heart ❤️, who integrates my faith into my work. As a follower of Jainism, I see my work as an opportunity to serve others and spread the message of Jainism.

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