प्रत्येक टोंक के अर्घ्य – पच्चीस टोंक के अर्घ्य

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जैन धर्म में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व है, और शिखर जी तीर्थ उन पवित्र स्थलों में सर्वोच्च स्थान रखता है जहाँ अनगिनत साधक आत्मकल्याण की राह पर अग्रसर हुए हैं। यह पर्वत स्थान केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रतीक है।

शिखर जी पर कुल पच्चीस प्रमुख टोंक स्थित हैं, जहाँ जैन तीर्थंकरों और अन्य सिद्ध पुरुषों ने तपस्या कर सिद्धत्व की प्राप्ति की। प्रत्येक टोंक पर चढ़ाए जाने वाले अर्घ्य की विधि, भावना और सामग्री का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस लेख में हमने शिखर जी के सभी पच्चीस टोंकों के अर्घ्य का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है, जिससे श्रद्धालुजन न केवल इन स्थानों की महत्ता को समझ सकें, बल्कि सही विधि से अर्घ्य अर्पण कर अपने आध्यात्मिक जीवन को और अधिक समृद्ध बना सकें।

टोंक प्रति जलादि द्रव्य चढ़ाने की विधि

(१) २४ तीर्थंकरों के गणधरों की कूट
चौबीसों जिनराज के, गण नायक हैं जेह ।
मन वच तन कर पूजहूं, शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्री गौतम स्वामी आदि गणधर देव गुणावा ग्राम के उद्यान आदि भिन्न-भिन्न स्थानोंसे निर्वाण पधारे हैं तिनके चरणारविन्दको जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा।

(२) ज्ञानधर कूट
कुन्थुनाथ जिनराज का, कूट ज्ञानधर जेह ।
मन वच तन कर पूजहूं, शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीकुन्थुनाथजिनेन्द्रादि ९६ कोड़ाकोड़ी ९६ करोड़ ३२ लाख ९६ हजार ७४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को मेरा मन वचन काय करि बारम्बार नमस्कार हो जलादि अर्धं निर्वपा० स्वाहा ।

(३) मित्रधर कूट
नमिनाथ जिनराज का कूट मित्रधर जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीनमिनाथ जिनेन्द्रादि नौ सौ कोड़ाकोड़ी १ अरब ४५ लाख ७ हजार ९४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविन्द को मेरा नमस्कार हो, जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(४) नाटक कूट
अरनाथ जिनराज का नाटक कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्रादि ९९ करोड़ ९९ लाख ९९ हजार मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(५) संबल कूट
मल्लिनाथ जिनराज का संबल कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीमल्लिनाथजिनेन्द्रादि ९६ करोड़ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(६) संकुल कूट
श्रेयांसनाथ जिनराज का संकुल कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीश्रेयोनाथजिनेन्द्रादि ९६ कोड़ाकोड़ी ९६ करोड ९६ लाख ९ हजार ५४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा।

(७) सुप्रभ कूट
पुष्पदन्त जिनराज का सुप्रभ कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूं शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्री पुष्पदन्तजिनेन्द्रादि मुनि एक कोड़ाकोड़ी ९९ लाख ७ हजार ४८० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(८) मोहन कूट
पद्मप्रभ जिनराज का मोहन कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीपद्मप्रभजिनेन्द्रादि ९९ करोड़ ८७ लाख ४३ हजार ७९० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(९) निर्जर कूट
मुनिसुव्रत जिनराज का निर्जर कूट है जेह |
मन वच कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीमुनिसुव्रतनाथजिनेन्द्रादि ९९ कोड़ाकोड़ी ९७ करोड़ ९ लाख ९९९ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(१०) ललित कूट
चन्द्रप्रभ जिनराज का ललित कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीचन्द्रप्रभजिनेन्द्रादि ९८४ अरब ७२ करोड़ ८० लाख ८४ हजार मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(११) आदिनाथ भगवान की टोंक
ऋषभदेव जिन सिद्ध भये, गिरिकैलाश से जोय ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर नमूं पद दोय ||
ॐ ह्रीं श्रीऋषभनाथजिनेन्द्रादि कैलाश पर्वत से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(१२) विद्युतवर कूट
शीतलनाथ जिनराज का कूट विद्युत वर जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीशीतलनाथजिनेन्द्रादि १८ कोड़ाकोड़ी ४२ करोड़ ३२ लाख ४२ हजार ९०५ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(१३) स्वयम्भू कूट
अनन्त नाथ जिनराज का कूट स्वयम्भू जेह ।
मन वच तन कर पूजहूं शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीअनन्तनाथजिनेन्द्रादि ९६ कोड़ाकोड़ी ७० करोड़ ७० लाख ७० हजार ७०० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा ।

(१४) धवल कूट
सम्भवनाथ जिनराज का धवल कूट धर जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीसम्भवनाथजिनेन्द्रादि ९ कोड़ाकोड़ी ७२ करोड़ ३२ लाख ४२ हजार ५०० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं०

(१५) वासुपूज्य भगवान की टोंक
वासुपूज्य जिन सिद्ध भये चम्पापुर से जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीवासुपूज्यजिनेन्द्रादि चम्पापुर से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(१६) आनन्द कूट
अभिनन्दन जिनराज का आनन्द कूट है जेह |
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीअभिनन्दननाथजिनेन्द्रादि ७२ कोड़ाकोड़ी ७० करोड़ ७० लाख ४२ हजार ७०० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घ

(१७) सुदत्त कूट
धर्मनाथ जिनराज का कूट सुदत्त वर जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीधर्मनाथजिनेन्द्रादि २९ कोड़ाकोड़ी १९ करोड ९ लाख ९ हजार ७९५ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घ०

(१८) अविचल कूट
सुमतिनाथ जिनराज का अविचल कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीसुमतिनाथजिनेन्द्रादि मुनि १ कोड़ाकोड़ी ८४ करोड़ ७२ लाख ८१ हजार ७०० मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा।

(१९) शान्तिनाथ कूट (कुन्दप्रभ)
शांतिनाथ जिनराज का कूट कुन्दप्रभ जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीशांतिनाथजिनेन्द्रादि ९ कोड़ाकोड़ी ९ लाख ९ हजार ९९९ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(२०) महावीर भगवान की टोंक
महावीर जिन सिद्ध भये पावापुर से जोय ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीमहावीरस्वामी पावापुर से सिद्ध भये तिनके चरणारविन्द को जलादि अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।

(२१) प्रभास कूट
सुपार्श्वनाथ जिनराज का प्रभास कूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीसुपार्श्वनाथजिनेन्द्रादि ४९ कोड़ाकोड़ी ८४ करोड़ ७२ लाख ७ हजार ७४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(२२) सुवीर कूट (सकुल कूट)
विमलनाथ जिनराज का कूट सुवीर है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्रादि ७० कोड़ाकोड़ी ६० लाख ६ हजार ७४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(२३) सिद्धवरकूट
अजितनाथ जिनराज का सिद्धवरकूट है जेह ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीअजितनाथजिनेन्द्रादि १ अरब ८० करोड़ ४४ लाख मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्धं निर्वपामीति स्वाहा ।

(२४) नेमिनाथ भगवान की टोंक
नेमिनाथ जिन सिद्ध भये सिद्ध क्षेत्र गिरनार ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ||
ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथभगवान गिरनार पर्वत से मोक्ष गये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घ निर्वपामीति स्वाहा ।

(२५) स्वर्णभद्र कूट
पार्श्वनाथ जिनराज का स्वर्ण भद्र है कूट ।
मन वच तन कर पूजहूँ शिखर सम्मेद यजेह ॥
ॐ ह्रीं श्रीपार्श्वनाथजिनेन्द्रादि ८२ करोड़ ८४ लाख ४५ हजार ७४२ मुनि इस कूट से सिद्ध भये तिनके चरणारविंद को जलादि अर्घं निर्वपामीति स्वाहा। इन कूटों का शुद्ध भाव से ध्यान धरने से व दर्शन करने से पशु गति से छुटकारा हो जाता है।

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Note

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Swarn Jain

My name is Swarn Jain, A blog scientist by the mind and a passionate blogger by heart ❤️, who integrates my faith into my work. As a follower of Jainism, I see my work as an opportunity to serve others and spread the message of Jainism.

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