पूजा एक धार्मिक आदर व्यक्त करने का एक धार्मिक आयोजन होता है जो भगवान, देवी-देवताओं, गुरु, या किसी पवित्र वस्तु की प्रतिमा, मूर्ति, के सामने किया जाता है

Saluna Parv Pooja – सलूना पर्व पूजा

पूज्य अकम्पन साधु-शिरोमणि, सात-शतक मुनि ज्ञानी | आ हस्तिनापुर के कानन में, हुए अचल दृढ़- ध्यानी ||१|| दु:खद सहा उपसर्ग भयानक, सुनकर मानव घबराये | आत्म-साधना के साधक वे, तनिक नहीं भी अकुलाये ||२|| योगिराज श्री विष्णु त्याग तप, वत्सलता-वश…

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जैन सप्तर्षि पूजा – Saptarishi Pooja

कवि श्री मनरंगलाल (छप्पय छन्द) प्रथम नाम श्रीमन्व दुतिय स्वरमन्व ऋषीश्वर | तीसर मुनि श्रीनिचय सर्वसुन्दर चौथो वर || पंचम श्रीजयवान विनयलालस षष्ठम भनि | सप्तम जयमित्राख्य सर्व चारित्र-धाम गनि || ये सातों चारण-ऋद्धि-धर, करूँ तास पद थापना | मैं…

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समाधीमरण पाठ (लघु) – Samadhi Maran Path

गौतम स्वामी वन्दों नामी मरण समाधि भला है। मैं कब पाऊँ निशदिन ध्याऊँ गाऊँ वचन कला है॥ देव-धर्म-गुरु प्रीति महादृढ़ सप्त व्यसन नहिं जाने। त्यागे बाइस अभक्ष्य संयमी बारह व्रत नित ठाने॥१॥ चक्की उखरी चूलि बुहारी पानी त्रस न विराधे।…

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श्रावक प्रतिक्रमण – Shravak Pratikraman

दव्वे खेत्ते काले भावे य कयावराहसोहणयं। जिंदणगरहणजुत्तो मणवककायेण पडिक्कमणं।। गाथार्थ - निन्दा और गहपूर्वक मन-वचन-काय के द्वारा द्रव्य, - क्षेत्र, काल और भाव के विषय में किए गए अपराधों का शोधन करना प्रतिक्रमण है। जीवे प्रमाद - जनिताः प्रचुराः प्रदोषाः,…

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श्री महावीर स्वामी जी जिन पूजा – Shree Mahaveer Swami Jin Pooja

कविश्री वृन्दावनदास (मत्त-गयंद छन्द) श्रीमत वीर हरें भव-पीर, भरें सुख-सीर अनाकुलताई | केहरि-अंक अरीकर-दंक, नयें हरि-पंकति-मौलि सुहाई || मैं तुमको इत थापत हूं प्रभु! भक्ति-समेत हिये हरषाई | हे करुणा-धन-धारक देव! इहाँ अब तिष्ठहु शीघ्रहि आई || ॐ ह्रीं श्रीवर्द्धमानजिनेन्द्र!…

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श्री विमलनाथ जी जिन पूजा – Shree Vimalnath Jin Pooja

सहस्रार दिवि त्यागि, नगर कम्पिला जनम लिय| कृतधर्मानृपनन्द, मातु जयसेना धर्मप्रिय || तीन लोक वर नन्द, विमल जिन विमल विमलकर| थापौं चरन सरोज, जजन के हेतु भाव धर|| ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्| ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र !…

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श्री अनंतनाथ जी जिन पूजा – Shree Anantnath Jin Pooja

पुष्पोत्तर तजि नगर अजुध्या जनम लियो सूर्या उर आय, सिंघसेन नृप के नन्दन, आनन्द अशेष भरे जगराय| गुन अंनत भगवंत धरे, भवदंद हरे तुम हे जिनराय, थापतु हौं त्रय बार उचरि के, कृपासिन्धु तिष्ठहु इत आय|| ॐ ह्रीं श्रीअनन्तनाथजिनेन्द्र !…

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श्री धर्मनाथ जी जिन पूजा – Shree Dharmnath Jin Pooja

तजि के सरवारथसिद्धि विमान, सुभान के आनि आनन्द बढ़ाये| जगमात सुव्रति के नन्दन होय, भवोदधि डूबत जंतु कढ़ाये|| जिनके गुन नामहिं प्रकाश है, दासनि को शिवस्वर्ग मँढ़ाये| तिनके पद पूजन हेत त्रिबार, सुथापतु हौं इहं फूल चढ़ाये|| ॐ ह्रीं श्रीधर्मनाथजिनेन्द्र…

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श्री शांतिनाथ जिन पूजा – Shri Shantinaath Jin Pooja

कविश्री बख्तावरसिंह (अडिल्ल छंद) सर्वारथ सुविमान त्याग गजपुर में आये| विश्वसेन भूपाल तासु के नंद कहाये|| पंचम-चक्री भये मदन-द्वादशवें राजे| मैं सेवूँ तुम चरण तिष्ठये ज्यों दु:ख भाजे|| ॐ ह्रीं श्री शांतिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर! अवतर! संवौषट्! (इति आह्वाननम्) ॐ ह्रीं…

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श्री कुंथुनाथ जी जिन पूजा – Shree Kunathunath Jin Pooja

अज अंक अजै पद राजै निशंक, हरे भवशंक निशंकित दाता| मदमत्त मतंग के माथे गँथे, मतवाले तिन्हें हने ज्यों अरिहाता|| गजनागपुरै लियो जन्म जिन्हौं, रवि के प्रभु नंदन श्रीमति-माता| सो कुंथु सुकंथुनि के प्रतिपालक, थापौं तिन्हें जुतभक्ति विख्याता| ॐ ह्रीं…

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श्री अरहनाथ जी जिन पूजा – Shree Arahnaath Jin Pooja

तप तुरंग असवार धार, तारन विवेक कर| ध्यान शुकल असिधार शुद्ध सुविचार सुबखतर|| भावन सेना, धर्म दशों सेनापति थापे| रतन तीन धरि सकति, मंत्रि अनुभो निरमापे|| सत्तातल सोहं सुभटि धुनि, त्याग केतु शत अग्र धरि| इहविध समाज सज राज को,…

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श्री मल्लिनाथ जी जिन पूजा – Shree Mallinath Jin Pooja

अपराजित तें आय नाथ मिथलापुर जाये| कुंभराय के नन्द, प्रभावति मात बताये|| कनक वरन तन तुंग, धनुष पच्चीस विराजे| सो प्रभु तिष्ठहु आय निकट मम ज्यों भ्रम भाजे|| ॐ ह्रीं श्रीमल्लिनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्| ॐ ह्रीं श्रीमल्लिनाथजिनेन्द्र !…

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