जैन धर्म की अत्यन्त प्राचीनता सिद्ध करने वाले अनेक उल्लेख साहित्य और विशेषकर पौराणिक साहित्यो में प्रचुर मात्रा में हैं। श्वेतांबर व दिगम्बर जैन पन्थ के दो सम्प्रदाय हैं

Bhagwan Parshvanath (पार्श्वनाथ)

भगवान पार्श्वनाथ का जीवन परिचय भगवान पार्श्वनाथ(Parshvanath) जैन धर्म के तेइसवें (23वें) तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म आज से लगभग 2 हजार 9 सौ वर्ष पूर्व वाराणसी के भेलूपुर में हुआ था। वाराणासी में अश्वसेन नाम के इक्ष्वाकुवंशीय क्षत्रिय राजा…

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Bhagwan Ajitnath(अजितनाथ)

भगवान अजितनाथ का जीवन परिचय भगवान अजितनाथ(Ajitnath) जैन धर्म के २४ तीर्थकरो में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर है। अजितनाथ का जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय राजपरिवार में माघ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में हुआ था। इनके पिता…

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भगवान अभिनन्दननाथ(Abhinandannath)

तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ का जीवन परिचय जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ(Abhinandannath) हैं। भगवान अभिनन्दननाथ जी को अभिनन्दन स्वामी के नाम से भी जाना जाता है। अभिनन्दननाथ स्वामी का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में माघ मास के शुक्ल पक्ष…

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भगवान पुष्पदंतनाथ(Puphpdant)

तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ का जीवन परिचय तीर्थंकर सुविधिनाथ, जो पुष्पदन्त(Puphpdant) के नाम से भी जाने जाते हैं, वर्तमान काल के 9वें तीर्थंकर है। इनका चिन्ह 'मगर' हैं। किसी दिन भूतहित जिनराज की वंदना करके धर्मोपदेश सुनकर विरक्तमना राजा दीक्षित हो…

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भगवान चन्द्रप्रभु(Chandrapabhu)

तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का जीवन परिचय श्री चंद्रप्रभु(Chandrapabhu) भगवान जैन धर्म के २४ तीर्थकरो में से वर्तमान काल के आठवें तीर्थंकर है। श्री चंदा प्रभु भगवान का गर्भ कल्याणक चैत्र कृष्णा पंचमी को ज्येष्ठा नक्षत्र में, चंद्र प्रभु का जन्म चन्द्रपुर…

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भगवान सुपार्श्वनाथ(Suparshvnath)

तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभ का जीवन परिचय भगवान सुपार्श्वनाथ(suparshvnath) वर्तमान अवसर्पिणी काल के सातवें तीर्थंकर थे। इनका जन्म वाराणसी के इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में हुआ था। बनारस नाम की नगरी थी उसमें सुप्रतिष्ठित महाराज राज्य करते थे। उनकी पृथ्वीषेणा रानी के गर्भ में…

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भगवान सुमतिनाथ(Sumatinath)

तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ का जीवन परिचय भगवान सुमतिनाथ(Sumatinath) जी वर्तमान काल के पांचवें तीर्थंकर थे। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें, जो संसार सागर(जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते…

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भगवान पद्मप्रभ(Padamprabh)

तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभ का जीवन परिचय भगवान पद्मप्रभ(Padamprabh) जी वर्तमान काल के छठवें तीर्थंकर थे। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें, जो संसार सागर(जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह…

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Uttam Kshama Quotes in Hindi

Uttam Kshama Quotes in Hindi क्षमा मांगना और दिल से क्षमा करना ही सच्ची क्षमा है। सिर्फ दूर-दूर के रिश्तों में हल्की सी जान पहचान में या जिनसे मधुर संबंध हो उनसे क्षमा की लेन देन कर हम स्वयं को…

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Acharya Shri 108 Samay Sagar Ji Maharaj

आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज का जीवन परिचय आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक के बेलगांव में 27 अक्टूबर 1958 को हुआ था। वे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पहले शिष्य भी हैं। समय…

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Acharya Shri Vidya Sagar Ji Maharaj – Jivan Parichay

(राष्ट्रसंत)आचार्य विद्यासागर का प्रारंभिक जीवन राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का जन्म कर्नाटक के बेलगाँव जिले के गाँव चिक्कोड़ी में आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था। पिता- श्री मल्लप्पाजी अष्टगे तथा माता- श्रीमती अष्टगे के आँगन…

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Bhagwan Sambhavnath(सम्भवनाथ)

भगवान सम्भवनाथ का जीवन परिचय भगवान संभवनाथ(Sambhavnath) जी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर थे। इनके पिता का नाम जितारी था तथा माता का नाम सुसेना था, प्रभु का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में मार्गशीर्ष चतुर्दशी को हुआ था। केवल ज्ञान…

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