Acharya shri Vidhyasagar ji maharaj

गुरु ने जहां जहां भी ज्योति जलाई है…Jain Bhajan

Guru Ne Jahan Jahan bhi Jyoti Jalai hai…” एक अत्यंत प्रेरणादायक और श्रद्धा से भरा हुआ जैन भजन है, जो सद्गुरु की कृपा, मार्गदर्शन और आत्मिक प्रकाश की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। जहाँ-जहाँ गुरु की वाणी पहुँची है, वहाँ अज्ञान दूर हुआ है, मोह मिटा है और आत्मा को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध हुआ है।

यह भजन बताता है कि गुरु के स्पर्श मात्र से जीवन में परिवर्तन आता है — वह मार्गदर्शक होते हैं जो जीव को मोक्षपथ की ओर ले जाते हैं। “गुरु ने जहाँ जहाँ भी ज्योति जलाई है…” भजन हमें प्रेरित करता है कि हम सच्चे गुरु को पहचानें, उनके बताए मार्ग पर चलें और अपने भीतर के अंधकार को ज्ञान और संयम से आलोकित करें।

Bhajan Lyrics

गुरु ने जहाँ-जहाँ भी ज्योति जलाई है।
काले-काले बादलों पर रोशनी सी छाई है।
विद्यासागर गुरुदेव… विद्यासागर गुरुदेव…

तन मन में वैराग्य जिनके समाया है।
शाश्वत सुख पाने छोड़ी जग माया है।
निर्मोही गुरुवर पे दुनिया रिसाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव… विद्यासागर गुरुदेव…

अखियों को खोल जरा ज्ञान के उजाले में
रख विश्वास पूरा जग रखवाले में ।
कितनी ही बार मैंने खुद को समझाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव… विद्यासागर गुरुदेव…

संकटों से भरा गुरु मुक्ति पथ हमारा है।
बीच भवर मैं नैया तेरा ही सहारा है।
हँसी खुशी आगे बढ़ो गुरु ने सिखाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव… विद्यासागर गुरुदेव…

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Note

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