जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? (Jain Raksha Bandhan)

जय जिनेंद्र मित्रों आज हम बात करेंगे जैन धर्म में रक्षाबंधन के महत्व की, जैन धर्म में रक्षाबंधन का क्या महत्व है जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है?…

Continue Reading जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? (Jain Raksha Bandhan)

श्री मल्लिनाथ चालीसा – Shri Mallinath Chalisa

Shri Mallinath Chalisa मोहमल्ल मद-मर्दन करते, मन्मथ दुर्द्धर का मद हरते ।। धैर्य खड्ग से कर्म निवारे, बालयति को नमन हमारे ।। बिहार प्रान्त ने मिथिला नगरी, राज्य करें कुम्भ…

Continue Reading श्री मल्लिनाथ चालीसा – Shri Mallinath Chalisa

Chalisa: श्री पद्मप्रभु चालीसा – Shri Padamprabhu Bhagwan

श्री पद्मप्रभु चालीसा (Shri Padamprabhu Chalisa) जैन धर्म के छठे तीर्थंकर, भगवान पद्मप्रभु की भक्ति का एक अद्भुत स्रोत है। लाल कमल (Red Lotus) के समान आभा वाले भगवान पद्मप्रभु…

Continue Reading Chalisa: श्री पद्मप्रभु चालीसा – Shri Padamprabhu Bhagwan

Bhagwan Sambhavnath(सम्भवनाथ)

भगवान सम्भवनाथ का जीवन परिचय भगवान संभवनाथ(Sambhavnath) जी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर थे। इनके पिता का नाम जितारी था तथा माता का नाम सुसेना था, प्रभु का जन्म इक्ष्वाकुवंशी…

Continue Reading Bhagwan Sambhavnath(सम्भवनाथ)

Bhagwan Aadinath (ऋषभदेव) जैन धर्म के पहले तीर्थंकर

भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर के पांच…

Continue Reading Bhagwan Aadinath (ऋषभदेव) जैन धर्म के पहले तीर्थंकर

जैन स्तुति पाठ – Stuti Paath

तुम तरणतारण भवनिवारण भविक मन आनन्दनो। श्रीनाभिनन्दन जगतवंदन आदिनाथ निरञ्जनो॥१॥ तुम आदिनाथ अनादि सेऊँ सेय पद पूजा करूँ। कैलाशगिरि पर रिषभ जिनवर पदकमल हिरदै धरूं॥२॥ तुम अजितनाथ अजीत जीते अष्टकर्म…

Continue Reading जैन स्तुति पाठ – Stuti Paath

विसर्जन पाठ(हिन्दी) – Visarjan Paath

दोहा बिन जाने वा जानके, रही टूट जो कोय। तुम प्रसाद तैं परमगुरु, सो सब पूरन होय॥ पूजनविधि जानूँ नहीं, नहिं जानूँ आह्वान। और विसर्जन हू नहीं, क्षमा करहु भगवान॥…

Continue Reading विसर्जन पाठ(हिन्दी) – Visarjan Paath

श्री पंच परमेष्ठी पूजा (णमोकारमंत्रव्रतसहित्) | Shri Panch Parmesthi Puja

समपदी चौपाई अरिहंतों को नमन हमारा, सिद्ध चक्र का जय-जयकारा । आचार्यों को वंदन प्यारा, पाठक मुनि का अर्चन न्यारा आह्वानन कर हृदय बिठाना, सन्निधि पाकर पूज रचाना। णमोकार व्रत…

Continue Reading श्री पंच परमेष्ठी पूजा (णमोकारमंत्रव्रतसहित्) | Shri Panch Parmesthi Puja