श्री पारसनाथ जी की आरती || Parasnath Bhagwan Aarti

चिंतामणि पारसनाथ भगवान की आरती  ओं जय पारस देवा स्वामी जय पारस देवा ! सुर नर मुनिजन तुम चरणन की करते नित सेवा| पौष वदी ग्यारस काशी में आनंद अतिभारी, अश्वसेन वामा माता उर लीनों अवतारी| ओं जय.. श्यामवरण नवहस्त…

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समाधीमरण पाठ (लघु) – Samadhi Maran Path

गौतम स्वामी वन्दों नामी मरण समाधि भला है। मैं कब पाऊँ निशदिन ध्याऊँ गाऊँ वचन कला है॥ देव-धर्म-गुरु प्रीति महादृढ़ सप्त व्यसन नहिं जाने। त्यागे बाइस अभक्ष्य संयमी बारह व्रत नित ठाने॥१॥ चक्की उखरी चूलि बुहारी पानी त्रस न विराधे।…

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समाधि मरण पाठ- Samadhi Maran Path

https://youtu.be/bahVjbFkVo4 बंदौं श्री अरहंत परम गुरु, जो सबको सुखदाई |इस जग में दुःख जो मैं भुगते, सो तुम जानो राई ||अब मैं अरज करूं प्रभु तुमसे, कर समाधि उर मांहीं|अंत समय में यह वर मांगूं, सो दीजै जगराई ||1|| भव-भव…

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समाधि भावना – JAIN SAMADHI BHAVNA

समाधि भावना (Samadhi Bhavna) जैन दर्शन का वह सर्वोच्च आध्यात्मिक चिंतन है जो मनुष्य को न केवल 'जीने की कला', बल्कि 'मरने की कला' (Art of Dying) भी सिखाता है। इसे अक्सर जीवन के अंतिम समय में या सल्लेखना (Santhara)…

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जैन आलोचना पाठ – Alochana Path

जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा और आत्म-कल्याण है। इस कठोर संयम मार्ग पर चलते हुए, श्रावक-श्राविकाओं से जाने-अनजाने में मन, वचन या काया से अनेक भूलें हो जाती हैं। इन भूलों और पापों का परिमार्जन (सफाई) करना आध्यात्मिक उन्नति…

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श्रावक-प्रतिक्रमण (लघु) | Shravak Pratikraman Laghu

ॐ नमः सिद्धेभ्यः| ॐ नमः सिद्धेभ्यः| ॐ नमः सिद्धेभ्यः|चिदानन्दैकरुपाय जिनाय परमात्मने|परमात्मप्रकाशाय नित्यं सिद्धात्मने नमः|| अर्थ – उन श्री जिनेन्द्र परमात्मा सिद्धत्मा को नित्य नमस्कार है जो चिदानन्द रुप हैं, अष्ट कर्मों को जीत चुके हैं, परमात्मा स्वरुप हैं और परमात्मा…

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श्रावक प्रतिक्रमण – Shravak Pratikraman

दव्वे खेत्ते काले भावे य कयावराहसोहणयं। जिंदणगरहणजुत्तो मणवककायेण पडिक्कमणं।। गाथार्थ - निन्दा और गहपूर्वक मन-वचन-काय के द्वारा द्रव्य, - क्षेत्र, काल और भाव के विषय में किए गए अपराधों का शोधन करना प्रतिक्रमण है। जीवे प्रमाद - जनिताः प्रचुराः प्रदोषाः,…

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श्री शांतिनाथजी भगवान् आरती – Shri Shantinath Ji Bhagwan ki Aarti

जय जिनवर देवा प्रभु जय जिनवर देवा| शांति विधाता शिवसुख दाता शांतिनाथ देवा ||टेक|| ऐरा देवी धन्य जगत में जिस उर आन बसे| विश्वसेन कुल नभ में मानो पूनम चन्द्र लसे ||१|| || जय जिनवर देवा || कृष्ण चतुर्दशी जेठ…

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श्री शांतिनाथ भगवान की आरती | Shree Shantinath Bhagwan Ki Aarti

जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी। जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी। मन वच तन से, तुमको वन्दु (२) जय अन्तरयामी प्रभु जय अन्तरयामी जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी। गर्भ जनम जब हुआ आपका (२) तीन…

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Shri Shantinath Bhagwan ki Aarti – श्री शांतिनाथ भगवान की आरती

शान्ति अपरम्पार है- आनन्द अपार है। शान्तिनाथ भगवान की आरती बारम्बार है।। शान्ति अप० पहली आरती पहले पद की, तीर्थंकर पद धारी की।। तीर्थंकर० वीतराग सर्वज्ञ हितंकर, छियालीस गुण धारी की।। छियालीस० शान्ति अपरम्पार है आनन्द अपार है। दूजी आरती…

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MAHAVIRASHTAK STOTRA – महावीराष्टक स्तोत्र

यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचित:, समं भान्ति ध्रौव्य-व्यय-जनि-लसन्तोन्तरहिता:| जगत्साक्षी मार्ग-प्रकटनपरो भानुरिव यो, महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ||१|| अताम्रं यच्चक्षु: कमल-युगलं स्पन्द-रहितम्, जनान्कोपापायं प्रकटयति बाह्यान्तरमपि| स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी वातिविमला, महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ||२|| नमन्नाकेन्द्राली-मुकुट-मणि-भा-जाल-जटिलम्, लसत्पादाम्भोज-द्वयमिह यदीयं तनुभृताम्| भवज्ज्वाला-शान्त्यै प्रभवति जलं…

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आरती श्री शांतिनाथ भगवान की – Aarti Shree Shantinath Bhagwan

|| शांतिनाथ भगवान की आरती || शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे| आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे| आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे| शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे| हस्तिनापुर में जनम लिये हे प्रभु देव करे जयकारा हो| जन्म महोत्सव…

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