सिद्धपूजा (भावाष्टक) हीराचंद जी | SiddhaPuja Heerachand Ji

(अडिल्ल छन्द) अष्ट-करम करि नष्ट अष्ट-गुण पाय के, अष्टम-वसुधा माँहिं विराजे जाय के | ऐसे सिद्ध अनंत महंत मनाय के, संवौषट् आह्वान करूँ हरषाय के || ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं सिद्धपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर! अवतर! संवौषट्! (इति आह्वाननम्) ॐ ह्रीं णमो…

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सिद्ध पूजा (भाषा) द्यानतराय || Siddha Puja

(पं. द्यानतराय) परमब्रह्म परमातमा, परमज्योति 'परमेश । परम निरंजन परम शिव, नमो परम सिद्धेश ॥         ॐ ह्रीं सिद्धचक्राधिपते सिद्धपरमेष्ठिन् अत्र अवतर अवतर संवौषट् । ॐ ह्रीं सिद्धचक्राधिपते सिद्धपरमेष्ठिन् अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः । ॐ ह्रीं…

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दर्शन – स्तुति (सकल-ज्ञेय) || Darshan Stuti

कविवर दौलतराम दोहा सकल-ज्ञेय-ज्ञायक   तदपि   निजानन्द-रस-लीन। सो जिनेन्द्र जयवन्त नित, अरि-रज-रहस-विहीन॥ पद्धरि जय वीतराग-विज्ञान पूर, जय मोह तिमिर को हरन सूर। जय ज्ञान अनन्तानन्त धार, दृग-सुख-वीरज-मण्डित अपार॥ जय परम शान्त मुद्रा समेत, भविजन को निज अनुभूति हेत। भवि भागन बच-जोगे…

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बीस तीर्थंकर पूजा (दीप अढ़ाई मेरु) || Bees Tirthankar Puja

पं. द्यानतराय दीप अढ़ाई मेरु पन 'अब तीर्थंकर बीस । तिन सबकी पूजा करूँ मन वच तन धरि शीस ॥ ॐ ह्रीं श्रीविद्यमानविंशतितीर्थङ्कराः ! अत्र अवतरत अवतरत संवौषट् । ॐ ह्रीं श्रीविद्यमानविंशतितीर्थङ्कराः ! अत्र तिष्ठत तिष्ठत ठः ठः । ॐ…

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Acharya Shri 108 Samay Sagar Ji Maharaj

आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज का जीवन परिचय आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक के बेलगांव में 27 अक्टूबर 1958 को हुआ था। वे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पहले शिष्य भी हैं। समय…

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जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? (Jain Raksha Bandhan)

जय जिनेंद्र मित्रों आज हम बात करेंगे जैन धर्म में रक्षाबंधन के महत्व की, जैन धर्म में रक्षाबंधन का क्या महत्व है जैन धर्म में राखी क्यों मनाई जाती है? और क्या जैन धर्म में भी यह भाई के द्वारा…

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श्री मल्लिनाथ चालीसा – Shri Mallinath Chalisa

Shri Mallinath Chalisa मोहमल्ल मद-मर्दन करते, मन्मथ दुर्द्धर का मद हरते ।। धैर्य खड्ग से कर्म निवारे, बालयति को नमन हमारे ।। बिहार प्रान्त ने मिथिला नगरी, राज्य करें कुम्भ काश्यप गोत्री ।। प्रभावती महारानी उनकी, वर्षा होती थी रत्नों…

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Chalisa: श्री पद्मप्रभु चालीसा – Shri Padamprabhu Bhagwan

श्री पद्मप्रभु चालीसा (Shri Padamprabhu Chalisa) जैन धर्म के छठे तीर्थंकर, भगवान पद्मप्रभु की भक्ति का एक अद्भुत स्रोत है। लाल कमल (Red Lotus) के समान आभा वाले भगवान पद्मप्रभु को शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। Shri…

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શ્રી ભક્તામર સ્તોત્રમ્ – Bhaktamar Stotra in Gujarati

(વસંતતિલકાવૃતમ્) ભક્તામર પ્રણત મૌલિ મણિ પ્રભાણા- મુદ્યોતકં દલિત પાપ તમો વિતાનમ્ ; સમ્યક્ પ્રણમ્ય જિન પાદ યુગં-યુગાદા- વાલમ્બનં ભવ જલે પતતાં જનાનામ્.।।૧।। યઃ સંસ્તુતઃ સકલ વાડ્મય તત્વ બોધા- દુદભૂત બુદ્ધિ પટુભિઃ સુરલોક નાથૈઃ; સ્તોત્રૈ ર્જગત્ત્રિતય ચિત્ત હરૈ રુદારૈઃ- સ્તોષ્યે કિલાહ મપિ…

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Acharya Shri Vidya Sagar Ji Maharaj – Jivan Parichay

(राष्ट्रसंत)आचार्य विद्यासागर का प्रारंभिक जीवन राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का जन्म कर्नाटक के बेलगाँव जिले के गाँव चिक्कोड़ी में आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था। पिता- श्री मल्लप्पाजी अष्टगे तथा माता- श्रीमती अष्टगे के आँगन…

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Bhagwan Sambhavnath(सम्भवनाथ)

भगवान सम्भवनाथ का जीवन परिचय भगवान संभवनाथ(Sambhavnath) जी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर थे। इनके पिता का नाम जितारी था तथा माता का नाम सुसेना था, प्रभु का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में मार्गशीर्ष चतुर्दशी को हुआ था। केवल ज्ञान…

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Bhagwan Aadinath (ऋषभदेव) जैन धर्म के पहले तीर्थंकर

भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर के पांच कल्याणक होते हैं। भगवान ऋषभनाथ जी को आदिनाथ भी कहा जाता…

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