दसलक्षण पर्व – उत्तम सत्य धर्म🙏 Uttam Satya Dharma

uttam satya dharma

🙏 Uttam Satya Dharma

मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है, उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये असत्य बोला करता है। असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। मनुष्य को सत्य बोलने से जब अपने ऊपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है। अथवा अपनी कोई हानि होती दिखती है। उस समय वह डरकर झूठ बोल देता है, झूठ बोलकर वह उस विपत्ति या हानि से बचने का प्रयत्न करता है।

विश्वसनीय और प्रामाणिक वह होता है जिसके हृदय में सरलता हो, आचरण में सच्चाई हो, और मन में सत्य के प्रति निष्ठा हो। सत्य का मूल सरलता है और असत्य का मूल क्रोध लोभ आदि विकार है।
सत्य ही विश्वास का आधार है।

हमें कठोर, कर्कश, मर्मभेदी वचनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जब भी बोलें हित मित प्रिय वचनों का प्रयोग अपने व्यवहार में लाना चाहिए तथा कहा भी गया है- ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहुँ शीतल होय।। कठोर वचन सत्य की श्रेणी में नहीं आते। सत्य का संबंध तो अहिंसा से है।

अहिंसा सत्य को सौंदर्य प्रदान करती है और सत्य ‍अहिंसा की सुरक्षा करता है। अहिंसा रहित सत्य कुरूप है और सत्य रहित अहिंसा क्षणस्थायी है। अहिंसा और सत्य एक सिक्के के दो पहलू है अहिंसा के अभाव में सत्य एवं सत्य के अभाव में अहिंसा की स्थिति नहीं है। नीतिकारों ने कहा है कि सत्य गले का आभूषण है, सत्य से वाणी पवित्र होती है जैसे स्नान करने से शरीर निर्मल हो जाता है।

सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो। क्रोध, लोभ, भय और हँसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। जहाँ न झूठ बोला जाता है, न ही झूठा व्यवहार किया जाता है वही लोकहित का साधक सत्यधर्म होता है।

🌿 उत्तम सत्य धर्म – सत्य भाषण और सत्य आचरण का मार्ग

“सत्यं वद” – सत्य बोलो
सत्य का अर्थ केवल झूठ न बोलना नहीं है, बल्कि मन, वचन और काया से सत्यता का पालन करना है।

उत्तम सत्य धर्म वह है जिसमें व्यक्ति स्वार्थ, डर, कपट या लोभ के कारण झूठ नहीं बोलता और न ही किसी को भ्रमित करता है। सत्य धर्म आत्मा की स्वाभाविक स्थिति है।


सत्य धर्म की विशेषताएँ:

  • मन, वाणी और कर्म में साम्यता (Consistency)
  • झूठ, कपट, धोखा, छल और प्रपंच से दूर रहना
  • किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ न छोड़ना
  • अहिंसा और करुणा से युक्त सत्य बोलना

📿 सत्य के लाभ:

  • मन की शांति और आत्मबल की प्राप्ति
  • समाज में विश्वास और सम्मान
  • आत्मा की शुद्धता और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति

📖 भगवान महावीर का आदर्श:

भगवान महावीर ने सत्य को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने कभी भी झूठ, दिखावा, या पाखंड का सहारा नहीं लिया। सत्य उनके उपदेशों का मूल रहा है।


💡 प्रेरणादायक विचार:

  • “सत्य ही धर्म है, असत्य अधर्म।”
  • “सत्य बोलना साहस है, और साहस ही साधक का गहना।”
  • “जो सत्य से डिगता नहीं, वह संसार के बंधनों से मुक्त हो जाता है।”

🔍 आत्मचिंतन के प्रश्न:

  • क्या मैं कभी स्वार्थ या भय के कारण असत्य बोलता हूँ?
  • क्या मेरे विचार, वचन और कार्यों में सच्चाई है?
  • क्या मेरा सत्य दूसरों को आहत तो नहीं करता?

🛕 उत्तम सत्य धर्म का अभ्यास कैसे करें?

  • सत्य बोलें, लेकिन विनम्रता और करुणा के साथ।
  • आत्मनिरीक्षण करें – दिन में किए गए हर कार्य की समीक्षा करें कि कहीं असत्य तो नहीं बोला।
  • सत्य आचरण करें – अपने कर्मों और व्यवहार में भी सच्चाई रखें।

Swarn Jain

My name is Swarn Jain, A blog scientist by the mind and a passionate blogger by heart ❤️, who integrates my faith into my work. As a follower of Jainism, I see my work as an opportunity to serve others and spread the message of Jainism.

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