“अपना करना हो कल्याण, साँचे गुरुवर को पहिचान” एक प्रेरणादायक Jain Bhajan है जो आत्मा को सच्चे मार्ग की ओर मोड़ने का आह्वान करता है। इस भजन में “साँचे गुरुवर” का अर्थ है — ऐसा सद्गुरु जो स्वार्थ से रहित होकर केवल आत्मा के उद्धार की भावना से उपदेश देते हैं।
भजन हमें समझाता है कि यदि हमें इस जीवन में आत्म-कल्याण करना है, तो पहले हमें एक सच्चे गुरु की पहचान करनी होगी — वह गुरु जो हमें मोह, माया और अज्ञानता से बाहर निकालकर आत्मा के शुद्ध स्वरूप का बोध कराए। यह भजन आत्म-जागृति, श्रद्धा और विनम्रता को बढ़ाता है और साधक को यह प्रेरणा देता है.
Bhajan Lyrics
अपना करना हो कल्याण, साँचे गुरुवर को पहिचान।
जिनकी वाणी में अमृत बरसता है ।।
रहते शुद्धातम में लीन, जो है विषय-कषाय विहीन।
जिनके ज्ञान में ज्ञायक झलकता है ।।1।।
जिनकी वीतराग छवि प्यारी, मिथ्यातिमिर मिटावनहारी।
जिनके चरणों में चक्री भी झुकता है ।।2।।
पाकर ऐसे गुरु का संग, ध्यावो ज्ञायक रूप असंग।।
निज के आश्रय से ही शिव मिलता है ।।3।।
अनुभव करो ज्ञान में ज्ञान, होवे ध्येय रूप का ध्यान।
फेरा भव भव का ऐसे ही मिटता है ।।4।।
अपना करना हो कल्याण, साँचे गुरुवर को पहिचान।
जिनकी वाणी में अमृत बरसता है ।।5।।

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Note
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